भारतकोश
वेणीसंहारम् (भट्ट नारायण - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

वेणीसंहारम् (भट्ट नारायण - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Venisamhara Nataka of Bhatta Narayana with Commentary

भट्ट नारायण द्वारा

DevanagariHindipublished355 पृष्ठ

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कथा-सार ११ कालीन मृदङ्गध्वनिके साथ वेश्याओंके सङ्गीतसे मैं जाग पड़ी।' इतना सुनते ही राजा दुर्योधन होश में आ गये। उन्हें यह मालूम हो गया कि यह सारा वृत्तान्त महारानी अपने स्वप्नका कह रही थीं। अच्छा हुआ कि मैंने आवेशमें आकर महारानीको कोई कटुवचन नहीं कहा। सचमुच आजकल मेरी बुद्धि स्थिर नहीं है। कथाप्रसङ्ग सम्पूर्ण होनेके पहले ही मैं नकुल (नेवला) को भीमका भाई माद्रीसुत समझकर व्यर्थमें महारानीकी गर्दन काटनेके लिए उद्यत हो गया था। अच्छा, महारानी अब अनिष्ट स्वप्नकी शान्तिके लिए भगवान् भास्करको अर्घ्यप्रदान करनेके लिए ध्यानस्थ हो रही हैं। यही अवसर महारानीके निकट जानेका है। यह सोचकर राजा संकेतसे सखियोंको दूर हटाकर पीछेसे महारानीकी अञ्जलिमें स्वयं पुष्पप्रदान करने लगे। परन्तु महारानीके अङ्गस्पर्शके सुखोंका अनुभव करते ही राजाके शरीरमें वासनाकी बिजली दौड़ गई। राजाका शरीर चञ्चल हो उठा और उनके हाथोंसे पुष्प पृथ्वीपर गिर पड़े। राजाके इस अशिष्ट व्यवहारसे महारानी तमक उठीं, परन्तु राजा अत्युग्र कामवासनाका अभिनय करते हुए रानीको वशमें लाने लगे। इतनेमें महाझंझावात (प्रचण्ड आँधी) से समस्त हस्तिना- पुर काँप उठा, त्राहि-त्राहिसे आकाश गूंजने लगा, दुर्योधनके विजय-रथकी पताका टूटकर धराशायी हो गयी, कौरवोंके शिविरमें आतङ्क सा छा गया, महारानी भानुमती भी त्रस्त होकर राजा दुर्योधनके गलेसे चिपक गयीं। इसी समय आर्तनाद करती हुई जयद्रथकी माता और उसकी पत्नी दुःशला (दुर्योधनकी बहिन) राजाके सामने आकर कहने लगी-महाराज ! गाण्डीव- धारी अर्जुनने पुत्रवियोगसे उद्विग्न होकर आज सूर्यास्तसे पहले महारथी जयद्रथको मारनेकी अटल प्रतिज्ञा कर ली है। उसके प्रकोपसे पृथ्वी काँप रही है। झंझावातसे वायुमण्डल दूषित हो गया है। रक्षा कीजिये महाराज, रक्षा कीजिये !!' यह समाचार सुन राजा दुर्योधनने उन दोनोंको सान्त्वना देकर रणस्थल की ओर प्रस्थान कर दिया। तृतीय अङ्क महारथी जयद्रथवधके संग्रामके दिन द्रुपद, द्युमत्स्येन, भूरिश्रवा, सोमदत्त, भगदत्त, बाह्लीक प्रभृति प्रधान-प्रधान राजाओं तथा जयद्रथ और असंख्य घोड़े-हाथियोंके वधसे रणस्थल इतना रक्तप्लावित हो चुका था कि रुधिर-