भारतकोश
वेणीसंहारम् (भट्ट नारायण - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

वेणीसंहारम् (भट्ट नारायण - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Venisamhara Nataka of Bhatta Narayana with Commentary

भट्ट नारायण द्वारा

DevanagariHindipublished355 पृष्ठ

पृष्ठ 354, कुल 355 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 354

श्लोकानुक्रमणिका २३५ पद्यानि | पृष्ठाङ्काः | पद्यानि | पृष्ठाङ्काः | | प्रत्यक्षं हतबन्धूनां | १८९ धर्मात्मजं प्रति यमौ | ८७ | प्रत्यक्षं हतबान्धवस्य | २१२ धिक्मानुजं कुरुपति | ११२ | प्रयत्नपरिवोधिनः | १३६ धृतराष्ट्रस्य तनयान् | १५ | प्रवृद्धं यद्वैरं मम | १६ धृतायुधो यावदहं | १४८ | प्राप्तावेकरथारूढौ | २२५ | | प्रालेयमिश्रमकरन्द | ५४ नाहं रक्षो न भूतः | ३१२ | प्रियमनुजमपश्यंस्त | ३११ निर्लज्जस्य दुरोदर | २८१ | प्रभावमृदुस्तिमित- | ७३ निर्वाणवैरदहनाः | ११ | | निर्वैर्यं गुरुशाप | १३८ | बालस्य मे प्रकृति | १६१ निर्वीर्यं वा सवीर्यं वा | २३९ | | निवापाञ्जलिदानेन | ११७ | भग्नं भीमेन भवतो | ८१ निविडोरस्येमिलुलित | १ | भवति तनय लक्ष्मीः | २२१ नूनं तेनाद्य वीरेण | २५० | भवेदक्षीभ्पद्रोणं | १२६ नोच्चैः सत्यपि | ४४ | भीष्मे द्रोणे च निहते | २१६ न्यस्ता न भ्रुकुटिर्न | ७६ | भूमौ क्षिप्तं शरीरं | ३१७ | | भूमौ निमग्नचक्रः | २२० पङ्के सैकते वा | २४५ | भूयः परिभवक्लान्ति | ४१ पद्मगहदाणं मंसए | ९२ | भ्रातुस्ते तनयेन | २९८ पञ्चानां मन्यसेऽस्माकं | २६१ | | पदे संदिग्ध एवास्मिन् | २७५ | मथ्नामि कौरवशतं | २४ परित्यक्ते देहे रण | १२१ | मदकलितकरेणु | १५९ पर्याप्तनेत्रमचिरोद्गत- | १८९ | मद्वियोगभयात्तातः | ११६ पर्यायेण हि दृश्यन्ते | ६६ | मन्थात्रस्तार्णवाम्भः | ३४ पाञ्चाल्या मन्युवह्निः | २५६ | मम प्राणाधिकं | २१८ पाप प्रियस्तव कथं | १४५ | मम हि वयसा | २९४ पापेन येन हृदयस्थ | २२२ | मया पीतं पीतं न तदनु | ३०४ पितुर्मूर्ध्नि स्पृष्टे | १२४ | मयि जीवति यत्तातः | १३३ पीताभ्यां मद्भुजाभ्यां | २३४ | महाप्रलयमारुत | १०० पूर्यन्तां सलिलेन | २६३ | मातः किमप्यसदृशं | २०२ प्रत्यक्षमरुधनुषां | १२० | मामुद्दिश्य त्यजन् | २१९