भारतकोश
विक्रमाङ्कदेवचरितम् (कल्याणी चालुक्य साम्राज्य इतिहास - सटीक)

विक्रमाङ्कदेवचरितम् (कल्याणी चालुक्य साम्राज्य इतिहास - सटीक)

Vikramankadeva Charitam of Bilhana with Commentary

महाकवि बिल्हण / पं. विश्वनाथ शास्त्री द्वारा

DevanagariSanskritpublished493 पृष्ठ

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( ९ ) पृष्ठ पृष्ठ प्रियप्रसादेन विलाससम्पदा <sup>...</sup> ११० भोगाय वैपुल्यविशेष <sup>...</sup> ३८ प्रेषितैरथ तयो परस्पर <sup>...</sup> ३३५ भोजक्ष्मापालविमुक्त <sup>...</sup> ७१ प्रौढिप्रकर्षेणपुराणरीति <sup>...</sup> १२ भ्रमयनङ्कुश दर्पात् <sup>...</sup> २७४ “फ” “म” फलेन शून्यं सुतरा <sup>...</sup> १०८ मदकरटिनमुत्कटप्रताप <sup>...</sup> ३८८ फालिन्दिव्यमियागृङ्कन् <sup>...</sup> २६८ मदस्तम्बेरमैस्तस्य <sup>...</sup> २०७ मदिरेव नरेन्ध्री <sup>...</sup> २६४ “ब” मनस्वितीना मनसो <sup>...</sup> ४४१ मन्युपङ्कलुष समु <sup>...</sup> २८७ बले समुल्लासमपाचकार <sup>...</sup> १३४ मम शुद्धे कुले जन्म <sup>...</sup> २४० बहुना किं प्रलापेन <sup>...</sup> २७५ मया निपीड्यमानास्ते <sup>...</sup> २७७ बहुभिरभिहिते किमद्भुतं <sup>...</sup> ३७९ मलयगिरिसमीरा <sup>...</sup> ४६२ बाणेन हत्वा मृगमस्य <sup>...</sup> ४१७ मलयेन तदीयस्त्री <sup>...</sup> २१० बाधिर्यमिव मङ्गल्य <sup>...</sup> २६५ मर्मव्यथाविस्मय <sup>...</sup> ४४६ बाहुरहवमल्लस्य <sup>...</sup> २५१ महति समरसङ्कटे <sup>...</sup> ३१३ ब्रह्मर्षिभिर्ब्रह्ममयी <sup>...</sup> २६ मातुस्तनोत्सङ्गविलास <sup>...</sup> १५३ ब्रूमस्त्वत्किमस्त्रकौशल <sup>...</sup> ८७ मानग्रन्थिकदर्थनाय <sup>...</sup> ४५५ मौलिल्लिासालिनपल्लवा <sup>...</sup> ४६ “भ” मुखपरिचितराजहंस <sup>...</sup> ४०५ मुखमसितपताकया <sup>...</sup> ३८९ भयभुवनमहोत्सवे <sup>...</sup> ३८६ मुखेन्दुसञ्जारकृताभिलाष <sup>...</sup> १५९ भाग्यभूमिरियं भारतादिषु <sup>...</sup> ३०९ मुदितमनसि जातमानखिदो <sup>...</sup> ३४४ भाग्यै प्रसूतेर्भगवान् <sup>...</sup> १८० मुष्टिप्रविष्टान्तरत्नदीप <sup>...</sup> १५४ भिद्यन्निरापादितसर्व <sup>...</sup> १४२ मुहु प्रकोपादुपरीस्थितासु <sup>...</sup> १३८ भुजप्रभादण्ड द्ववोर्ध्वगामी <sup>...</sup> १ मृगाङ्कचूडस्य किरीट <sup>...</sup> १२० भूपेषु कूपेष्विवरिक्त <sup>...</sup> ६७ मृगीदृश श्यामलचूचुक <sup>...</sup> १३२ भूभृत्सहस्त्रापितदेहरन्धै <sup>...</sup> ५८ मृणालसूत्र निजवल्लभामा <sup>...</sup> २६ भृङ्गालीभिरधिज्यमन्मथ <sup>...</sup> ४६४ मृदुहृदयतया गुणानुरागा <sup>...</sup> ३४७ भृङ्गेविश्ववियोगिवर्गं <sup>...</sup> ४५७ मौलिचुम्बितवसुन्धरा <sup>...</sup> ३०१