विष्णु पुराण

विष्णु पुराण
Vishnu Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished558 पृष्ठ
पृष्ठ 479, कुल 558 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 479
४६८
| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अथैनं भगवान्वाह | ... | ४ | ४ | २५ | अनादिमध्यान्तमजम् | ... | १ |
| अथोपवाह्यादादाय | ... | ५ | १२ | १३ | अनाशी परमार्थश्च | ... | २ |
| अदित्यैवं स्तुतो विष्णुः | ... | ५ | ३० | २४ | अनागच्छति तस्मिन्नृसेनः | ... | ४ |
| अदित्या तु कृतानुज्ञः | ... | ५ | ३० | २८ | अनाद्यतैव साधुत्वहेतुः | ... | ४ |
| अदीर्घह्रस्वमस्थूलम् | ... | १ | १४ | ३९ | अनाख्येयस्वरूपामन् | ... | ५ |
| अदृश्याय ततस्तस्मै | ... | ५ | १ | ६६ | अनिरुद्धोऽपि रुक्मिणः | ... | ४ |
| अदृष्टाः पुरुषैःस्त्रीभिः | ... | ५ | २ | ६ | अनिकेताः ह्यनाहाराः | ... | ३ |
| अद्य मे सफलं जन्म | ... | ५ | १७ | ३ | अन्निन्दं भक्षयेदित्थम् | ... | ३ |
| अद्याप्याघूर्णिताकारम् | ... | ५ | ३५ | ३७ | अनिलस्य शिवा भार्या | ... | १ |
| अद्यैव ते व्यलीकलज्जावत्याः | ... | ४ | ६ | २९ | अनिष्क्रमणे च मधुरिपुरसौ | ... | ४ |
| अद्यैव देव कंसोऽयम् | ... | ५ | ३ | १९ | अनिरुद्धो रणेऽरुद्धः | ... | ५ |
| अधर्मबीजमुद्धृतम् | ... | १ | ६ | १५ | अनुज्ञां देहि भगवन् | ... | १ |
| अधमोत्तमौ न तेष्वास्ताम् | ... | २ | ४ | ७९ | अनुशिष्टोऽसि केनेदृक् | ... | १ |
| अधश्चोर्ध्वं च ते दीप्ताः | ... | ६ | ३ | २१ | अनुतप्ता शिखी चैव | ... | २ |
| अधिसीमकृष्णात् | ... | ४ | २१ | ७ | अनुदिनानुरूढस्नेह० | ... | ४ |
| अधोमुखो वै क्रियते | ... | ६ | ५ | १५ | अनुदिनं चोपभोगतः | ... | ४ |
| अधःशिरोभिर्दृश्यन्ते | ... | २ | ६ | ३३ | अनुयातैनमन्त्रान्या | ... | ५ |
| अनष्टद्रव्यता च | ... | ४ | ११ | १७ | अनुरागेण शैथिल्यम् | ... | ५ |
| अनन्यचेतसस्तस्य | ... | १ | १२ | ७ | अनुयुक्तौ ततस्तौ तु | ... | ५ |
| अनन्तरं च तुर्वसुम् | ... | ४ | १० | १३ | अनुभूतमिवान्यस्मिन् | ... | ६ |
| अनभ्यर्च्य ऋषीन्देवान् | ... | ३ | १८ | ५० | अनृतमेव व्यवहारजयहेतुः | ... | ४ |
| अनन्तरं च सा | ... | ४ | ७ | ३२ | अनेन दुष्टकपिना | ... | ५ |
| अनरण्यस्य पृषदश्वः | ... | ४ | ३ | १८ | अनेकजन्मसाहस्रीम | ... | ६ |
| अनक्षज्ञो हली द्यूते | ... | ५ | २८ | ११ | अनेरानकदुन्दुभिः | ... | ४ |
| अनन्तरं हरेशार्ङ्गम् | ... | ५ | २२ | ६ | अन्तर्जले यदाश्चर्यम् | ... | ५ |
| अनन्तरं चाशेषः | ... | ४ | २४ | ९९ | अन्तर्द्धानं गते तस्मिन् | ... | ५ |
| अनन्तरं च सप्तमम् | ... | ४ | १५ | २८ | अन्तर्वत्न्यहमब्दान्ते | ... | ४ |
| अनमित्रस्य पुत्रः | ... | ४ | १४ | १ | अन्तरटव्यामचिन्तयत् | ... | ४ |
| अनमित्रस्यान्वये | ... | ४ | १४ | ५ | अन्तःपुराणां मञ्जाश्च | ... | ५ |
| अनन्तरं चातिशुद्ध० | ... | ४ | १२ | ३३ | अन्तःप्रविष्टश्च धात्र्याः | ... | ४ |
| अनन्तरं च तैरूक्तम् | ... | ४ | ४ | ७९ | अन्तःपुरे निपतितम् | ... | ५ |
| अनन्तरं च तेनापि | ... | ४ | ४ | ५४ | अन्धकारीकृते लोके | ... | ५ |
| अनसूया तथैवात्रेः | ... | १ | १० | ८ | अन्धकारीकृते लोके | ... | ६ |
| अनावृष्टिभयप्रायाः | ... | ६ | १ | २४ | अन्धं तम इवाज्ञानम् | ... | ६ |
| अनावृष्ट्यादिसम्पर्कात् | ... | ६ | ४ | १२ | अन्नशाकाम्बुदानेन | ... | ३ |
| अनायतैस्समस्तैश्च | ... | ६ | ५ | ३१ | अन्नाग्रञ्च समुद्धृत्य | ... | ३ |
| अनात्मन्यात्मबुद्धिर्या | ... | ६ | ७ | ११ | अन्नेन वा यथाशक्त्या | ... | ३ |
| अनादिर्भगवान्कालः | ... | १ | २ | २६ | अन्नं बलाय मे भूमे | ... | ३ |
| अनाराधितगोविन्दैः | ... | १ | ११ | ४३ | अन्यजन्मकृतैः पुण्यैः | ... | १ |
| अनाकाशमसंस्पर्शम् | ... | १ | १४ | ४० | अन्यथा सकला लोकाः | ... | १ |
| अनामगोत्रमसुखम् | ... | १ | १४ | ४१ | अन्यस्मै कन्यारत्नमिदम् | ... | ४ |