विष्णु पुराण

विष्णु पुराण
Vishnu Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished558 पृष्ठ
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| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कृष्णोऽपि चिन्तयामास | ... ५ | २३ | ९ | कंसाय चाष्टमो गर्भः | ... ५ | १ | ६७ |
| कृष्णोऽपि घातयित्वारिम् | ... ५ | २४ | ६ | कंसाय नारदः प्राह | ... ५ | १५ | ३ |
| कृष्णोऽपि बलभद्राद्यैः | ... ५ | २६ | ५ | कंसे गृहीते कृष्णेन | ... ५ | २० | ९० |
| कृष्णोऽपि कुपितस्तेषाम् | ... ५ | ३७ | ४९ | कंसोऽपि कोपरक्ताक्षः | ... ५ | २० | ८२ |
| कृष्णो ब्रवीति राजार्हम् | ... ५ | २१ | १५ | कंसोऽपि तदुपश्रुत्य | ... ५ | १ | ६८ |
| कृष्यान्ता प्रथिता सीमा | ... ५ | १० | ३२ | कंसो नाम महाबाहुः | ... ५ | १२ | २१ |
| केचिच्चतुर्युगं यावत् | ... १ | १२ | ९३ | कंसः कुवलयापीडः | ... ५ | २९ | ५ |
| केचिन्निन्दां वेदानाम् | ... ३ | १८ | २५ | कः केन हन्यते जन्तुः | ... १ | १८ | ३१ |
| केचिन्नीलोत्पलश्यामाः | ... ६ | ३ | ३२ | क्रकचैः पाट्यमानानाम् | ... ६ | ५ | ४६ |
| केचिद्रासभवर्णाभाः | ... ६ | ३ | ३३ | क्रतुर्भर्गस्तथोर्णांयुः | ... २ | १० | १४ |
| केचित्पुरवराकाराः | ... ६ | ३ | ३६ | क्रतोश्च सन्ततिर्भार्या | ... १ | १० | ११ |
| केन बन्धेन बद्धोऽहम् | ... ६ | ५ | २२ | क्रथस्य स्नुषापुत्रस्य | ... ४ | १२ | ४० |
| केवलात्सुधृतिर्भूत् | ... ४ | १ | ३९ | क्रमेण विधिवद्यागम् | ... ६ | ६ | ३६ |
| केवलाद्वन्धुमान् | ... ४ | १ | ४३ | क्रमेण तत्तु बाहूनाम् | ... ५ | ३३ | ३८ |
| केशास्थिकण्टकामेध्य० | ... ३ | १२ | १५ | क्रमेण येन पीतोऽसौ | ... २ | १२ | ५ |
| केशिध्वजो विमुक्त्यर्थम् | ... ६ | ७ | १०५ | क्रमेणानेन जेष्यामः | ... ४ | २४ | १३० |
| केशिध्वज निबोध त्वम् | ... ६ | ७ | २ | क्रियमाणेऽभिषेके तु | ... ५ | १२ | १४ |
| केशिनो वदने तेन | ... ५ | १६ | १० | क्रियतां तन्महाभागाः | ... ५ | १ | २८ |
| केशी चापि बलोदग्रः | ... ५ | १६ | १ | क्रियते किं वृथा वत्स | ... १ | ११ | ७ |
| केशेष्वाकृष्य विगलत् | ... ५ | २० | ८६ | क्रियाहानिगृहे यस्य | ... ३ | १८ | ९८ |
| कैवर्त्तवटुपुलिन्द० | ... ४ | २४ | ६२ | क्रोडेन वत्सानाक्रम्य | ... ५ | ११ | ११ |
| को धर्मः कश्च वाधर्मः | ... ६ | ५ | २३ | क्रोष्टोस्तु यदुपुत्रस्य | ... ४ | १२ | १ |
| को नग्नः किं समाचारः | ... ३ | १७ | ४ | क्रौञ्चद्वीपो महाभाग | ... २ | ४ | ४६ |
| को नु स्वप्नस्सभाग्याभिः | ... ५ | १८ | २७ | क्रौञ्चद्वीपे द्युतिमतः | ... २ | ४ | ४७ |
| कोपं यच्छत राजानः | ... १ | १५ | ६ | क्रौञ्चश्च वामनश्चैव | ... २ | ४ | ५० |
| कोपः स्वल्पोऽपि ते नास्ति | ... ५ | ७ | ५३ | क्रौञ्चद्वीपः समुद्रेण | ... २ | ४ | ५७ |
| कोऽयं कथमयं मत्स्य० | ... ५ | २७ | ९ | क्रौञ्च्यो वैतालिकास्तद्वत् | ... ३ | ४ | २४ |
| कोऽयं विष्णुः सुदुर्बुद्धे | ... १ | १७ | २१ | क्रोधा तु जनयामास | ... १ | २१ | २४ |
| कोऽयं शक्रमखो नाम | ... ५ | १० | १८ | क्रौर्यमायामयं घोरम् | ... ३ | १७ | २१ |
| कोशलान्ध्रपुण्ड्रताम्र० | ... ४ | २४ | ६४ | क्लेशादुत्क्रान्तिमाप्नोति | ... ६ | ५ | ४२ |
| कौटिल्य एव चन्द्रगुप्तम् | ... ४ | २४ | २८ | क्व च त्वं पञ्चवर्षीयः | ... १ | १२ | १७ |
| कौपीनाच्छादनप्रायाः | ... ५ | ३० | २० | क्वचिद्रहन्तावन्योन्यम् | ... ५ | ६ | ३४ |
| कौरवाणां महीपत्वम् | ... ५ | ३५ | २३ | क्वचिद्गोभिस्समं रम्यम् | ... ५ | ६ | ४५ |
| कंसपलयस्ततः कंसम् | ... ५ | २१ | ७ | क्वचित्कदम्बस्रक्चित्री | ... ५ | ६ | ४६ |
| कंसस्य रजकः सोऽथ | ... ५ | १९ | १५ | क्व नाकपृष्ठगमनम् | ... २ | ६ | ४४ |
| कंसस्तदोद्विग्न मनाः | ... ५ | ४ | १ | क्व निवासो भवान्विप्र | ... २ | १५ | १८ |
| कंसस्तूर्णमुपेत्यैनाम् | ... ५ | ३ | २५ | क्व निवासस्तवेत्युक्तम् | ... २ | १५ | २३ |
| कंसस्य करदानाय | ... ५ | ३ | १९ | क्व पन्नगोऽल्पवीर्योऽयम | ... ५ | ७ | ५६ |
| कंसश्च त्वामुपादाय | ... ५ | १ | ८० | क्व यौवनोन्मुखीभूत० | ... ५ | २० | ६० |
| कंसस्तयोर्वररथम् | ... ५ | १ | ६ | क्व शरीरमशेषाणाम् | ... १ | १७ | ६२ |
| कंसाकंसवतीसुतनु० | ... ४ | १४ | २१ | क्वाथ्यतां तैलमध्ये च | ... ६ | ५ | ४८ |