विष्णु पुराण

विष्णु पुराण
Vishnu Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished558 पृष्ठ
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| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| गर्भजन्मजराज्ञान० | ६ | ५ | ९ | गृहान्ता द्रव्यसङ्घाताः | ६ | १ | २० |
| गर्भसंकर्षणात्सोऽथ | ५ | १ | ७६ | गृहीत्वामरराजेन | १ | ९ | ९ |
| गर्भश्च युवनाश्वस्य | ४ | २ | ५६ | गृहीतानिनिन्द्रियैरर्थान् | १ | १४ | ३५ |
| गर्भप्रच्युतिदोषेण | २ | १३ | १७ | गृहीतनीतिशास्त्रं तम् | १ | १९ | २७ |
| गर्भवासादि यावत्तु | १ | १७ | ५९ | गृहीतनीतिशास्त्रस्ते | १ | १९ | २८ |
| गर्भमात्मवधार्थाय | १ | २१ | ३५ | गृहीतो विष्टिना विप्रः | २ | १३ | ५६ |
| गर्भेषु सुखलेशोऽपि | १ | १७ | ६९ | गृहीतग्राह्यवेदश्च | ३ | ९ | ७ |
| गर्वमारोपिता यूयम् | ५ | ३५ | १७ | गृहीतविद्यो गुरवे | ३ | १० | १३ |
| गवामेतत्कृतं वाक्यम् | ५ | १२ | १६ | गृहीत्वा भ्रामयामास | ५ | ८ | ९ |
| गाण्डीवस्रिषु लोकेषु | ५ | ३८ | ५० | गृहीतास्त्रौ ततस्तौ तु | ५ | २१ | २६ |
| गार्ग्यं गोष्ठ्यां द्विजं श्यालः | ५ | २३ | १ | गृहीत्वा तां हलान्तेन | ५ | २५ | १० |
| गाधिश्च सत्यवतीं कन्याम् | ४ | ७ | १२ | गृहीतचिह्नवेषोऽहम् | ५ | ३४ | १० |
| गाधिरप्यतिरोषणाय | ४ | ७ | १४ | गृहीत्वा विधिवत्सर्वम् | ५ | ३५ | १० |
| गायतामन्यगोपानाम् | ५ | ६ | ४८ | गृहीता दस्युभिर्याश्च | ५ | ३८ | ७० |
| गायतोऽङ्गात्समुत्पन्नाः | १ | ५ | ४६ | गृह्णाति विषयान्नित्यम् | १ | १४ | ३४ |
| गायन्ति चैतत्पितरः कदा नु | ३ | १४ | १९ | गोपुरीषमुपादाय | ५ | ५ | १३ |
| गायन्ति देवाः किल गीतकानि | २ | ३ | २४ | गोकुले वसुदेवस्य | ५ | १ | ७४ |
| गायत्रं च ऋचश्चैव | १ | ५ | ५३ | गोत्रभेदभयाच्छक्तोऽपि | ४ | १३ | २८ |
| गावस्तु तेन पतता | ५ | ११ | १० | गोदावरी भीमरथी | २ | ३ | १२ |
| गावस्त्वतः समुद्भूताः | १ | १२ | ६१ | गोपवृद्धास्ततः सर्वे | ५ | ६ | २१ |
| गावश्शैलं ततश्चक्रुः | ५ | १० | ४६ | गोपगोपीजनैर्हृष्टैः | ५ | ११ | २१ |
| गिरितटे च सकलमेव | ४ | १३ | ४० | गोपालदारकों प्राप्तौ | ५ | २० | १९ |
| गिरियज्ञस्त्वयं तस्माद् | ५ | १० | ३६ | गोपांश्चाह हसञ्छौरिः | ५ | ११ | १७ |
| गिरिमूर्द्धनि कृष्णोऽपि | ५ | १० | ४७ | गोपाः केनेति केनेदम् | ५ | ६ | ४ |
| गीतावसाने च भगवन् | ४ | १ | ७० | गोपीपरिवृतो रात्रिम् | ५ | १३ | २३ |
| गीतं सनत्कुमारेण | ३ | १४ | ११ | गोपीकपोलसंश्लेषम् | ५ | १३ | ५५ |
| गीयमानः स गोपीभिः | ५ | ७ | ८३ | गोपैश्च पूर्ववद्रामः | ५ | २४ | २१ |
| गुणसाम्यमनुद्रिक्तम् | ६ | ४ | ३४ | गोपैस्सम्मानैससहितौ | ५ | ६ | ५१ |
| गुणप्रवृत्त्या भूतानाम् | २ | १४ | ५ | गोप्यश्च वृन्दशः कृष्ण० | ५ | १३ | २४ |
| गुणत्रयमयं ह्येतद् | १ | ७ | ४८ | गोप्यस्त्वन्या रुदन्त्यश्च | ५ | ७ | २५ |
| गुणसाम्ये ततस्तस्मिन् | १ | २ | २७ | गोप्यः पप्रच्छुरपराः | ५ | २४ | १२ |
| गुणसाम्यात् | १ | २ | ३३ | गोभिश्च चोदितः कृष्ण | ५ | १२ | ११ |
| गुणा न चास्य ज्ञायन्ते | १ | १३ | ५५ | गोमेदश्चैव चन्द्रश्च | २ | ४ | ७ |
| गुणाञ्जनगुणाधार० | १ | २० | १० | गोवाटमध्ये क्रीडन्तौ | ५ | ६ | १२ |
| गुरुदेवद्विजातीनाम् | ५ | २१ | ४ | गौतमादिभिरन्यैस्त्वम् | १ | ९ | २१ |
| गुरूणामपि सर्वेषाम् | १ | १८ | १६ | गौरवेणातिमहता | ५ | २० | ८९ |
| गुरूणामग्रतो वक्तुम् | ५ | १८ | २२ | गौरजः पुरुषो मेषः | १ | ५ | ५१ |
| गृत्समदस्य शौनकः | ४ | ८ | ६ | गौरी लक्ष्मीर्महाभागा | १ | ८ | २८ |
| गृहस्थस्य सदाचारम् | ३ | ११ | १ | गौरी कुमुद्वती चैव | २ | ४ | ५५ |
| गृहस्य पुरुषव्याघ्र | ३ | ११ | ४५ | गौरीं वाप्युद्वहेत्कन्याम् | ३ | १६ | २० |
| गृहाणि च यथान्यायम् | १ | ६ | १९ | गाः पालयन्तौ च पुनः | ५ | ८ | १ |