विष्णु पुराण

विष्णु पुराण
Vishnu Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished558 पृष्ठ
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| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पितामहश्च भगवान् | ... | १ | १३ | ४४ | पुत्रः पौत्रः प्रपौत्रो वा | ... | ३ |
| पिता माता तथा भ्राता | ... | ५ | २४ | १६ | पुत्रपौत्रैः परिवृतः | ... | ५ |
| पिता चास्याचिन्तयदद्यम् | ... | ४ | ४ | ९ | पुत्रश्चाजायत | ... | ४ |
| पितामहाय चैवान्यम् | ... | ३ | १५ | ४२ | पुत्रद्रव्यकलत्रेषु | ... | ३ |
| पिता पितामहश्चैव | ... | ३ | १५ | ३२ | पुत्रश्चेत्परमार्थः स्यात् | ... | २ |
| पिता पितामहश्चैव | ... | ३ | १५ | ३३ | पुत्रसङ्क्रमितश्रीस्तु | ... | २ |
| पिता पितामहश्चैव | ... | ३ | १५ | ३४ | पुत्रञ्च सुमहावीर्यम् | ... | १ |
| पिता पितामहश्चैव | ... | ३ | १५ | ३५ | पुत्रि सर्वं एवात्मपुत्रम् | ... | ४ |
| पिता गुरुर्न सन्देहः | ... | १ | १८ | १७ | पुत्रि कस्मान्न जायसे | ... | ४ |
| पिता च मम सर्वस्मिन् | ... | १ | १८ | १५ | पुनश्च प्रणम्य भगवते | ... | ४ |
| पितामहेन दत्तार्थ्यः | ... | १ | १ | २३ | पुनश्च तृतीयं रोमपादसंज्ञम् | ... | ४ |
| पितृमातृसपिण्डेस्तु | ... | ३ | १३ | ३८ | पुनरपि अक्षयवीर्य० | ... | ४ |
| पितृपूजाक्रमः प्रोक्तः | ... | ३ | १३ | ७ | पुनश्चेदिराजस्य | ... | ४ |
| पितृदेवमनुष्यादीन् | ... | २ | ११ | २१ | पुनरप्यच्युतविनिपातम् | ... | ४ |
| पितृदेवातिथींस्त्यक्त्वा | ... | २ | ६ | १६ | पुनश्च स्वपुरमाजगाम | ... | ४ |
| पितृपुत्रसुहृद्भ्रातृ० | ... | ५ | १७ | १३ | पुनरप्या जगामाथ | ... | ५ |
| पितृवधामर्षपूर्णा | ... | ४ | १३ | ७२ | पुनश्च गर्भे भवति | ... | ६ |
| पितृवचनाच्चागणि० | ... | ४ | ४ | ९५ | पुनश्चेश्वरकोपात् | ... | ४ |
| पितृभ्यः प्रथमं भक्त्या | ... | ३ | १५ | ४४ | पुनस्तयोक्तं स ज्ञात्वा | ... | ३ |
| पितृतीर्थेन सतिलम् | ... | ३ | १५ | ४० | पुनश्च रक्ताम्बरधृक् | ... | ३ |
| पितृगीतान्तथैवात्र | ... | ३ | १४ | २१ | पुनश्च पद्मादुत्पन्ना | ... | १ |
| पितॄणामपसव्यं तत् | ... | ३ | १५ | २१ | पुनश्च मधुसंज्ञेन | ... | १ |
| पितॄणां धर्मराजं तं | ... | १ | २२ | ५ | पुनर्गते वर्षशते | ... | १ |
| पितॄणां प्रीणनार्थाय | ... | ३ | ११ | २९ | पुनश्च कामासंयोगात् | ... | २ |
| पित्रर्थं चापरं विप्रम् | ... | ३ | ११ | ६४ | पुनस्तथैव शिविकाम् | ... | २ |
| पित्रा प्रचेतसः प्रोक्ताः | ... | १ | १४ | ९ | पुनः पाकमूपादाय | ... | ३ |
| पित्रापराजिस्तास्तस्य | ... | १ | १३ | ४८ | पुनः पुनः प्रणम्योभौ | ... | ५ |
| पिपीलिकाः कीटपतंगकाद्याः | ... | ३ | ११ | ५२ | पुमान्न देवो न नरः | ... | २ |
| पिबतां तत्र चैतेषाम् | ... | ५ | ३७ | ४० | पुमान्सर्वगतो व्यापी | ... | २ |
| पिबन्ति द्विकलाकारम् | ... | २ | १२ | १२ | पुमान् स्त्री गौरजो वाजी | ... | २ |
| पीतनीलाम्बरधरौ | ... | ५ | १९ | १९ | पुरप्रवेशे प्रमथैः | ... | ५ |
| पीते वसानं वसने | ... | ५ | १८ | ४० | पुरञ्जयाज्जनमेजयः | ... | ४ |
| पीतेऽमृते च बलिभिः | ... | १ | ९ | १११ | पुरञ्जयो नाम राजर्षेः | ... | ४ |
| पीतं तं द्विक्लं सोमम् | ... | २ | ११ | २३ | पुराणसंहिताकर्ता | ... | १ |
| पीत्वाम्भांसि समस्तानि | ... | ६ | ३ | १८ | पुरा ममागतो वत्स | ... | ३ |
| पुच्छेग्निश्च महेन्द्रश्च | ... | २ | १२ | ३४ | पुरा हि त्रेतायाम् | ... | ४ |
| पुण्ड्राः कलिंगा मगधाः | ... | २ | ३ | १६ | पुरा गार्ग्यण कथितम् | ... | ५ |
| पुण्यदेशप्रभावेण | ... | २ | १३ | ५ | पुराणं वैष्णवं चैतत् | ... | ६ |
| पुण्योपचयसम्पन्नः | ... | १ | ११ | २१ | पुरुषाः षट् च षष्टिश्च | ... | ४ |
| पुण्याः प्रदेशा मेदिन्याः | ... | ६ | ८ | १६ | पुरुकुत्सो नर्मदायाम् | ... | ४ |
| पुत्रकास्मान्निवर्त्तस्व | ... | १ | १२ | १५ | पुरुकुत्साय सन्ततिविच्छेदः | ... | ४ |