विष्णु पुराण

विष्णु पुराण
Vishnu Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
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| श्लोकाः | अंशा० | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशा० | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ब्रह्मक्षत्रस्य यो योनिः | ... | ४ | २१ | १८ | भ० | ||
| ब्रह्मणश्च दक्षिणांगुष्ठ० | ... | ४ | १ | ६ | भक्तिच्छेदानुलिप्तांगौ | ... | ५ |
| ब्रह्मचारी गृहस्थश्च | ... | ३ | १८ | ३७ | भक्तिभेदानुलिप्तांगौ | ... | ५ |
| ब्रह्मचर्येण वा कालम् | ... | ३ | १० | १४ | भक्षयत्यथ कल्पान्ते | ... | ३ |
| ब्रह्महत्याव्रतं चीर्णम् | ... | ३ | ५ | १४ | भक्षयित्वा च भूतानि | ... | १ |
| ब्रह्मणा चोदितो व्यासः | ... | ३ | ४ | ७ | भक्ष्यभोज्यमहापान० | ... | २ |
| ब्रह्महत्याश्वमेधाभ्याम् | ... | २ | ८ | ९६ | भक्ष्याभक्ष्येषु नास्यास्ति | ... | ६ |
| ब्रह्मविष्णुशिवा ब्रह्मन् | ... | १ | २२ | ५८ | भगवद्विष्णुपादांगुष्ठ० | ... | ४ |
| ब्रह्मन्प्रसादप्रवणम् | ... | १ | १ | ११ | भगवन्नेभिस्सगरतनयैः | ... | ४ |
| ब्रह्मणो दिवसे ब्रह्मन् | ... | १ | ३ | १६ | भगवन्भूतभव्येश | ... | १ |
| ब्रह्मणोऽभून्महान् | ... | १ | ७ | ११ | भगवानपि सर्वात्मा | ... | १ |
| ब्रह्मरूपधरो देवः | ... | १ | ४ | ५० | भगवन्यदि मे तोषम् | ... | १ |
| ब्रह्मणा देवदेवेन | ... | १ | १४ | १० | भगवन्भूतभव्येश | ... | १ |
| ब्रह्मपारं मुनेः श्रोतुम् | ... | १ | १५ | ५४ | भगवन्बालवैधव्यात् | ... | १ |
| ब्रह्म प्रभूर्महा स सर्वभूतः | ... | १ | १५ | ५७ | भगवन्सम्मगाख्यातम् | ... | २ |
| ब्रह्मबन्धो किमेतत्ते | ... | १ | १७ | १७ | भगवन्सम्मगाख्यातम् | ... | २ |
| ब्रह्मत्वे सृजते विश्वम् | ... | १ | १९ | ६६ | भगवन्त्वत्तया प्रोक्तम् | ... | २ |
| ब्रह्मा नारायणाख्योऽसौ | ... | १ | ४ | १ | भगवन्भगवांदेवः | ... | ३ |
| [ब्रह्माद्यैरस्य वेदज्ञैः | ... | १ | १२] | भगवन्नन्नरैः कार्यम् | ... | ४ | |
| ब्रह्मा जनार्दनः शम्भुः | ... | १ | १३ | २१ | भगवन्नेवमवस्थिते | ... | ४ |
| ब्रह्माक्षरमजं नित्यम् | ... | १ | १५ | ५८ | भगवन् अस्मत्कुलस्थितिरियम् | ... | ४ |
| ब्रह्मा दक्षादयः कालः | ... | १ | २२ | ३१ | भगवत्यासज्याखिलम् | ... | ४ |
| ब्रह्मा सृजत्यादिकाले | ... | १ | २२ | ३५ | भगवन्तोऽखिलसंसार० | ... | ४ |
| ब्रह्माद्यैरर्चितो यस्तु | ... | ५ | ७ | ६६ | भगवन्मयैतदज्ञानात् | ... | ४ |
| ब्रह्माद्यास्सकला देवाः | ... | ५ | ३० | १७ | भगवन्नस्माकमत्र | ... | ४ |
| ब्रह्मेन्द्ररुद्रनासत्य० | ... | ३ | १४ | १ | भगवन् भवन्तं द्रष्टुम् | ... | ४ |
| ब्राह्मणाम्भोजयेच्छ्राद्धे | ... | ३ | १५ | १ | भगवन्नायमादित्यः | ... | ४ |
| ब्राह्मणाद्यास्तु ये वर्णाः | ... | ३ | १८ | ४८ | भगवदागमनोद्भूत० | ... | ४ |
| ब्राह्मणक्षत्रियविशाम् | ... | ३ | ८ | २१ | भगवानपि यथानुभूतम् | ... | ४ |
| ब्राह्मणः क्षत्रियो वैश्यः | ... | ३ | ८ | १२ | भगवन्ममैतत्स्यमन्तकरत्नम् | ... | ४ |
| ब्राह्मणाः क्षत्रिया वैश्याः | ... | २ | ४ | ३९ | भगवता च स निधन० | ... | ४ |
| ब्राह्मणाः क्षत्रिया वैश्याः | ... | २ | ४ | ३१ | भगवान् यदि प्रसन्नः | ... | ४ |
| ब्राह्मणाः क्षत्रिया वैश्याः | ... | २ | ३ | ९ | भगवतोऽप्यत्र मर्त्यलोके | ... | ४ |
| ब्राह्मणाः क्षत्रिया वैश्याः | ... | १ | ६ | ६ | भगवानप्यथोत्पातान् | ... | ५ |
| ब्राह्मणाः क्षत्रिया वैश्याः | ... | ४ | २४ | ११६ | भगवन्मन्यया कार्यम् | ... | ५ |
| ब्राह्मणेभ्यः पितृभ्यश्च | ... | २ | ८ | ७९ | भगवानपि गोविन्दः | ... | ५ |
| ब्राह्मे मुहूर्ते चोत्थाय | ... | ३ | ११ | ५ | भगवंस्तमहं योगम् | ... | ६ |
| ब्राह्मो नैमित्तिकस्तेषाम् | ... | ६ | ३ | २ | भगवन्कथितं सर्वम् | ... | ६ |
| ब्राह्मो दैवस्तथैवार्षः | ... | ३ | १० | २४ | भगीरथात्सुहोत्रः | ... | ४ |
| ब्राह्मो नैमित्तिकस्तत्र | ... | १ | ७ | ४२ | भगीरथाद्धास्सगरः ककुत्स्थः | ... | ४ |
| ब्राह्मं पाद्मं वैष्णवं च | ... | ३ | ६ | २१ | भागोदये ते कौन्तेय | ... | ५ |