विष्णु पुराण

विष्णु पुराण
Vishnu Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished558 पृष्ठ
पृष्ठ 541, कुल 558 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 541
५३०
| श्लोकाः | अंशा० | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशा० | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वर्णधर्मादयो धर्माः | ६ | ८ | १७ | वसुदेवोऽपि विन्यस्य | ५ | ३ | २१ |
| वर्णाश्रमविरुद्धं च | २ | ६ | ३२ | वसुदेवोऽपि तं प्राह | ५ | ५ | २ |
| वर्णाश्रमाचारवती | ६ | १ | १० | वसुदेवसुतौ तत्र | ५ | १५ | १४ |
| वर्णानामाश्रमाणां च | १ | ६ | ३३ | वस्तु राजेति यल्लोके | २ | १३ | ९९ |
| वर्णाश्च तत्र चत्वारः | २ | ४ | १६ | वस्त्वस्ति किं कुत्रचिदादिमध्य० | २ | १२ | ४१ |
| वर्णास्तत्रापि चत्वारः | २ | ४ | ३८ | वस्त्वेकमेव दुःखाय० | २ | ६ | ४७ |
| वर्णाश्रमेषु ये धर्माः | ३ | ८ | १९ | वस्त्रश्विमरुदादित्य० | ५ | ३७ | १७ |
| वर्णाश्रमाचारवता | ३ | ८ | ९ | वस्वौकसारा शक्रस्य | २ | ८ | ९ |
| वर्द्धते हसते चैव | २ | ८ | ६६ | वहन्ति पन्नगा यक्षैः | २ | १० | २१ |
| वर्षतां जलदानां च | ५ | ३ | १७ | वहन्ति पन्नगा यक्षैः | २ | ११ | १७ |
| वर्षत्रयान्ते च बभूवुरसेन० | ४ | १३ | १०७ | वह्निश्च वायुना वायुः | २ | ७ | २४ |
| वर्षचलेषु रम्येषु | २ | ४ | ८ | वह्निना पार्थिवे धातौ | २ | १५ | २० |
| वर्षाचलास्तु सप्तैते | २ | ४ | ४२ | वह्निस्थाली मयैषा | ४ | ६ | ८० |
| वर्षाणां च नदीनां च | २ | १२ | ३६ | वह्निना येऽक्षया दत्ताः | ५ | ३८ | २४ |
| वर्षातपादिषुच्छत्री | ३ | १२ | ३८ | वह्नेः प्रभा तथा भानुः | २ | ८ | २२ |
| वर्षेष्वेतेषु रम्येषु | २ | ४ | ५२ | वाङ्मनःकायजैर्दोषैः | ६ | १ | ५७ |
| वर्षेष्वेतेषु तान्पुत्रान् | २ | १ | २४ | वाच्यश्च पौण्ड्रको गत्वा | ५ | ३४ | ९ |
| वर्षैरेकगुणां भार्याम् | ३ | १० | १६ | वाच्यश्च द्वारकावासी | ५ | ३७ | ५९ |
| वलयाकारमेकैकम् | २ | ४ | ७७ | वाजिरूपधरः सोऽथ | ३ | २ | ७ |
| वलित्रिभंगिना मग्न | ६ | ७ | ८२ | वाद्यमानेषु तूर्येषु | ५ | २० | ३० |
| वल्पन्ति गोपाः कृष्णेन | ५ | २० | ८४ | वानप्रस्था भविष्यन्ति | ६ | १ | ३३ |
| वल्गता मुष्टिकेनैव | ५ | २० | ५८ | वानप्रस्थविधानेन | २ | १ | ३० |
| वल्मीकमूषिकोद्भूताम् | ३ | ११ | १६ | वामनो रक्षतु सदा | ५ | ५ | १७ |
| ववल्गुतुस्ततो रंगे | ५ | २० | ८१ | वामपादाम्बुजांगुष्ठ० | २ | ८ | १०९ |
| वश्यता परमा तेन | ६ | ७ | ४४ | वामपादस्थिते तस्मिन् | १ | १२ | ९ |
| वसन्ति तत्र भूतानि | ६ | ५ | ७५ | वायव्यां वायवे दिक्षु | ३ | ११ | ४८ |
| वसति मनसि यस्य | ३ | ७ | ३४ | वायुना चाहतां दिव्याम् | ५ | २१ | १७ |
| वसति हृदि सनातने च | ३ | ७ | २५ | वायोरपि गुणं स्पर्शम् | ६ | ४ | २४ |
| वसवो मरुतः साध्याः | १ | ९ | ७० | वाय्वग्निद्रव्यसम्भूतः | २ | १२ | १६ |
| वसतां गोकुले तेषाम् | ५ | ५ | ७ | वाराहं द्वादशं चैव | ३ | ६ | २३ |
| वसिष्ठोऽप्यनेन समन्विप्सितम् | ४ | ५ | ५ | वारिवह्न्यनिलाकाशैः | १ | २ | ५९ |
| वसिष्ठं च होतारम् | ४ | ५ | २ | वार्यायुधप्रतोदास्तु | ३ | १३ | २१ |
| वसिष्ठश्चापुत्रेण राज्ञा | ४ | ४ | ६९ | वार्यौधैः सन्ततैैर्यस्याः | २ | ८ | १११ |
| वसिष्ठशापाच्च षष्ठे | ४ | ४ | ५८ | वासवाजैकपादर्कं | ३ | १४ | ९ |
| वसिष्ठः काश्यपोऽथात्रिः | ३ | १ | ३२ | वासुदेवोऽपि द्वारकामाजगाम | ४ | १३ | १०५ |
| वसिष्ठतनया ह्येते | ३ | १ | १५ | वासुदेवात्मकं मूढ | ५ | ३४ | ७ |
| वसिष्ठाद्यैर्दयासौरैः | १ | ९ | २२ | वासुदेवे मनो यस्य | २ | ६ | ४३ |
| वसुदेवस्य जातम् | ४ | १४ | २८ | विकासाणुस्वरूपैश्च | १ | २ | ३२ |
| वसुदेवस्य त्वानकदुन्दुभेः | ४ | १५ | १८ | विकाले च समं गोभिः | ५ | ६ | ५० |
| वसुदेवस्य या पत्नी | ५ | १ | ६४ | विकासिनेत्रयुगलः | ५ | १९ | १८ |
| वसुदेवेन कंसाय | ५ | १ | ६९ | विकासिमुखपद्माभ्याम् | ५ | १९ | २० |