विष्णु पुराण

विष्णु पुराण
Vishnu Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished558 पृष्ठ
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| श्लोकाः | अंशा० | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशा० | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| विश्वामित्रपुत्रस्तु ... | ४ | ३७ | ३७ | विहाराद्युपभोगेषु ... | ५ | २७ | २९ |
| विश्वामित्रस्तथा कण्वः ... | ५ | ३७ | ६ | विंशतिस्तु सहस्राणि ... | १ | ३ | २१ |
| विश्वेदेवास्तु विश्वायाः ... | १ | १५ | १०६ | वीथ्याश्रयाणि ऋक्षाणि ... | २ | १२ | २ |
| विश्वेदेवास्सपितरः ... | ३ | १५ | ५४ | वीरमादाय तं साम्बम् ... | ५ | ३५ | २९ |
| विश्वेदेवान्विश्वभूतान् ... | ३ | ११ | ४९ | वीरुधौषधिनिष्पत्त्या ... | २ | १२ | १५ |
| विश्वं भवान्सृजति सूर्यगभस्तिरूपः... | ५ | १८ | ५७ | वीर्यं तेजो बलं चाल्पम् ... | ३ | ३ | ६ |
| विषयेभ्यस्समावृत्य ... | ५ | ७ | ६८ | वृकाद्याश्च सुता माद्र्याम् ... | ५ | ३२ | ४ |
| विषयेभ्यस्समाहृत्य ... | ६ | ७ | २९ | वृक्षाम्रगर्भसम्भूता ... | १ | १५ | ५० |
| विषाणभंगमुन्मत्तः ... | १ | १५ | १५१ | वृक्षाणां पर्वतानां च ... | १ | २२ | २० |
| विषाणाग्रेण मद्बाहूम् ... | २ | १३ | २६ | वृक्षाद्दारु ततश्चेयम् ... | २ | १३ | ९३ |
| विषाणलोज्ज्वलमुखाः ... | १ | १५ | १४७ | वृक्षारूढो महाराजः ... | २ | १३ | ९४ |
| विषाग्निना प्रसरता ... | ५ | ७ | ४ | वृतो मयायं प्रथमं मयायम् ... | ४ | २ | ९३ |
| विषुवे चापि सम्प्राप्ते ... | ३ | १४ | ५ | वृतं वासुकिरम्भाद्यैः ... | ५ | १८ | ३७ |
| विष्कम्भा रचिता मेरोः ... | २ | २ | १७ | वृत्त्यर्थं याजयेच्चान्यान् ... | ३ | ८ | २३ |
| विष्टरार्थं कुशं दत्त्वा ... | ३ | १५ | १९ | वृथा कथा वृथा भोज्यम् ... | ६ | २ | २० |
| विष्ण्वाधारं यथा चैतत् ... | २ | १३ | २ | वृथैवास्माभिः शतधनुः ... | ४ | १३ | १०० |
| विष्णुचक्रं करे चिह्नम् ... | १ | १३ | ४६ | वृद्धोऽहं मम कार्याणि ... | १ | १७ | ७३ |
| विष्णुर्मन्वादयः कालः ... | १ | २२ | ३२ | वृन्दावनमितः स्थानात् ... | ५ | ६ | २४ |
| विष्णुपदाद्विनिष्क्रान्ता ... | २ | २ | ३३ | वृन्दावनं भगवता ... | ५ | ६ | २८ |
| विष्णुसंस्मरणात्क्षीण० ... | २ | ६ | ४२ | वृन्दावनचरं घोरम् ... | ५ | १५ | १० |
| विष्णुरश्वतरो रम्भा ... | २ | १० | १८ | वृषस्य पुत्रो मधुरभवत् ... | ४ | ११ | २६ |
| विष्णुमाराध्य तपसा ... | ३ | १ | २५ | वृष्ट्या धृतमिदं सर्वम् ... | २ | ९ | २२ |
| विष्णुशक्तिरनौपम्या ... | ३ | १ | ३५ | वृष्णोः सुमित्रः ... | ४ | १३ | ८ |
| विष्णुप्रसादादनघः ... | ३ | २ | १८ | वृष्ण्यन्धककुलं सर्वम् ... | ५ | ३८ | ६१ |
| विष्णुस्समस्तेन्द्रियदेहदेही ... | ३ | ११ | ९६ | वेगवतो बुधः ... | ४ | १ | ४५ |
| विष्णुरत्ता तथैवान्नम् ... | ३ | ११ | ९७ | वेगीपूयवहे चैकः ... | २ | ६ | १९ |
| विष्णुस्तेषां प्रमाणे च ... | ४ | १५ | ४९ | वेणूरन्ध्रप्रभेदेन ... | २ | १४ | ३२ |
| विष्णुशक्तिः परा प्रोक्ता ... | ६ | ७ | ६१ | वेदवादविदो विद्वन् ... | १ | २ | २२ |
| विष्णुं ग्रसिष्णुं विश्वस्य ... | १ | २ | ७ | वेदंयज्ञमयं रूपम् ... | १ | ४ | ९ |
| विष्णुः पितृगणः पद्मा ... | १ | ८ | २४ | वेदवादांस्तथा वेदान् ... | १ | ६ | ३० |
| विष्णुः शस्त्रेषु युष्मासु ... | १ | १७ | ३३ | वेदना स्वसुतं चापि ... | १ | ७ | ३४ |
| विष्णोस्तस्य प्रभावेण ... | ५ | ३८ | ६५ | वेददूषयिता यश्च ... | २ | ६ | १३ |
| विष्णोः सकाशादुद्भूतम् ... | १ | १ | ३१ | वेदमित्रस्तु शाकल्यः ... | ३ | ४ | २१ |
| विष्णोः स्वरूपात्परतः ... | १ | २ | २४ | वेदमेकं चतुर्भेदम् ... | ३ | २ | ५८ |
| विष्ण्वाज्योतिःप्रधानास्ते ... | २ | १ | ४१ | वेदद्रुमस्य मैत्रेय ... | ३ | ३ | ४ |
| विसस्मार तथात्मानम् ... | १ | २० | २ | वेदव्यासा व्यतीता ये ... | ३ | ३ | १० |
| विसर्जयेत्प्रीतिवचः ... | ३ | १५ | ४९ | वेदवादविरोधवचन० ... | ४ | २० | ३० |
| विस्तारः सर्वभूतस्य ... | १ | १७ | ८४ | वेदमार्गे प्रलीने च ... | ६ | १ | ३९ |
| विस्तार एष कथितः ... | २ | ५ | १ | वेदादानं करिष्यन्ति ... | ६ | १ | ३२ |
| विहंगमाः कामगमाः ... | ३ | २ | ३० | वेदाभ्यासकृतप्रीती ... | ५ | २१ | २० |
| विस्तारिताक्षियुगलः ... | ५ | २० | ५३ | वेदान्तवेद्य देवेश ... | ५ | ७ | ५९ |