विष्णु पुराण

विष्णु पुराण
Vishnu Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
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| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| हिडिम्बा घटोत्कचम् | ४ | २० | ४५ | हिंसाहिंसे मृदुक्रूरे | १ | ५ | ६१ |
| हितं मितं प्रियं काले | ३ | १२ | ३४ | हृदयस्थस्ततस्तस्य | १ | १९ | २४ |
| हिमवान्हेमकूटश्च | २ | २ | ११ | हृदि नारायणस्तस्य | २ | ९ | २४ |
| हिमालयं स्थावराणाम् | १ | २२ | ८ | हृदि यदि भगवाननादिरास्ते | ३ | ७ | २७ |
| हिमाह्वयं तु वै वर्षम् | २ | १ | २७ | हृदि संकल्प्य यद्रूपम् | ५ | ७ | ६९ |
| हिमाम्बुघर्मवृष्टीनाम् | ३ | ५ | २० | हृदि नारायणश्चास्ते | २ | १२ | ३२ |
| हिरण्यधान्यतनय० | ६ | ५ | ३८ | हे दिग्गजाः संकटदन्तमिश्राः | १ | १७ | ४१ |
| हिरण्यगर्भादिषु च | ६ | ७ | ५१ | हे दैत्यपतयो ब्रूत | ३ | १८ | ३ |
| हिरण्यकशिपोः पुत्राः | ५ | १ | ७० | हे प्रलम्ब महाबाहो | ५ | ४ | २ |
| हिरण्यकशिपोः पुत्राः | १ | १५ | १४२ | हेमचन्द्रश्च विशालस्य | ४ | १ | ५० |
| हिरण्यकशिपुत्वे च | ४ | १५ | १ | हेमकूटं तथा वर्षम् | २ | १ | १९ |
| हिरण्यनाभस्य पुत्रः | ४ | ४ | १०८ | हे राम हे कृष्ण सदा | ५ | ८ | ४ |
| हिरण्यनाभशिष्यस्तु | ३ | ६ | ७ | हे विप्रचित्ते हे राहो | १ | १९ | ५२ |
| हिरण्यनाभात्तावत्यः | ३ | ६ | ५ | हे सूदा मम पुत्रोऽसौ | १ | १८ | २ |
| हिरण्यनाभः कौसल्यः | ३ | ६ | ४ | हे हर्यश्वा महावीर्याः | १ | १५ | ९२ |
| हिरण्मयं रथं यस्य | ३ | ५ | २५ | हे हे शालिनि मद्गेहे | २ | १५ | १४ |
| हिरण्यकशिपुः श्रुत्वा | १ | १९ | १ | हैहयपुत्रो धर्मस्तस्यापि | ४ | ११ | ८ |
| हिरण्यगर्भपुरुष० | १ | ११ | ५५ | होमदेवार्चनाद्यासु | ३ | १२ | २० |
| हिरण्यगर्भवचनम् | २ | १३ | ४४ | होमैर्जपैस्तथा दानैः | ३ | १८ | ५६ |
| हिरण्यरोमा वेदश्रीः | ३ | १ | २२ | हंसकुन्देन्दुधवलम् | ५ | १७ | २३ |
| हिरण्यगर्भदेवेन्द्र० | ६ | ८ | २२ | ह्रस्वदीर्घप्लुतैर्यत्तु | ६ | ४ | ४४ |
| हिरण्यगर्भो भगवान् | ६ | ७ | ५६ | ह्रासवृद्धी त्वहर्भागैः | २ | ८ | ६० |
| हिंसा भार्या त्वधर्मस्य | १ | ७ | ३२ | ह्लादिनी सन्धिनी संवित् | १ | १२ | ६८ |