विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)

विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)
Vishnudharmottara Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (सम्पादक: डॉ. प्रियबाला शाह) द्वारा
स्रोत: Sri Vishnu Dharmottara Mahapuranam 1000p Classic Edition (उद्गम)
DevanagariHindipublished1,001 पृष्ठ
पृष्ठ 11, कुल 1001 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 11
॥ श्रीगणेशाय नमः ॥
अथ विष्णुधर्मोत्तरमहापुराणविषयानुक्रमणिकारम्भः ।
प्रथमखण्डः १।
| अध्यायाः | विषयाः | पत्राङ्काः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| १ | कथाप्रस्तावः । | ... | २ |
| २ | अशरीरस्यापि नारायणस्य लोकसिसृक्षया हिरण्यगर्भोत्पादनम् | ३ | १ |
| ३ | भगवतो विष्णोर्वराहरूपेण भूम्युद्धारः । | ३ | १ |
| ४ | कालाग्निरुद्रपातालसुतलाऽधस्तात्तलादिपातालानां तदभिधानाभिधानम् | ... | १ |
| ५ | भूरादिसप्तलोकानां तत्रत्यसप्तवायुस्कन्धानान्तीर्थनिवासिनाञ्च वर्णनम् | ४ | १ |
| ६ | सप्तद्वीपसप्तसागरमण्डलवर्णनावसरे क्षीरोदमध्ये श्वेतद्वीपमहि-माभिधानम् | ५ | १ |
| ७ | जम्बूद्वीपे हिमवदादिकुलपर्वतवर्णनप्रसङ्गे सुमेरोर्वास्तुवर्णनम्, हेमकू-टोत्तरो हरिवर्षाभिधानान्तरं कुलपर्वतेषु क्रमेण यक्षदैत्यगन्धर्वादीनां विहारभूमिमभिधानम् | ६ | १ |
| ८ | नवविधभारतवर्षेष्वष्टादशमहागिरिच्छत्रत्वाभिधानपुरस्सरं भारते कृतयु-गवर्तिषु रम्यकत्वादिषु किन्नरूपादिष्वेषु निवासकथनम् | ७ | १ |
| अध्यायाः | विषयाः | पत्राङ्काः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| ९ | पाञ्चालिजनपदवर्णनम् | ७ | २ |
| १० | महेन्द्रमल्यादिसप्तकुलपर्वतनिर्गतनदीवर्णनम् | ८ | १ |
| ११ | हिमांगतुङ्गवनदेवीवर्णनम् | ” | २ |
| १२ | कोसलप्रशंसाख्यानम् | ” | ” |
| १३ | अयोध्यावर्णनम् | ” | ” |
| १४ | मनुपूत्रेक्ष्वाकुप्रशंसा | ९ | १ |
| १५ | मधुकैटभवधोपाख्यानसम्बद्धेऽसमर्थब्रह्माङ्गुष्ठसमोहितोन्मीलितनयनानन्ध | ” | ” |
| १६ | भार्गवोत्तंकश्रुतिप्रसन्नेन विष्णुना तस्मा इच्छाजलोत्पादनशक्ति-मदानन्तत्तदनुमतेन वृद्धदर्शन राज्ञो कुवलयाश्वशरीरान्तःप्रविष्टभगवत्सहाये-नोदकराक्षसतस्य धुन्धोर्हननं स्वस्य धुन्धुमारनामप्रसिद्धिलाभश्च | ” | २ |
| १७ | धुन्धुमारवंशोत्पत्तिकथनावसरे श्रीधुन्धुमागोद्विवसनकल्पवृक्षाद्वराजस्य हैहयतालजङ्घादिहन्तृःपराजयोऽरण्ये सगरोत्पत्त्यवसाने पश्चात्प्रभाते-श्वयवनेन सगरास्य धनुर्रागिविद्यापारगामित्वादियोग्यतापादनानन्तरं दारमाहाद्यापादनम् | १० | १ |