विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)

विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)
Vishnudharmottara Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (सम्पादक: डॉ. प्रियबाला शाह) द्वारा
स्रोत: Sri Vishnu Dharmottara Mahapuranam 1000p Classic Edition (उद्गम)
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वि० ध० ॥ ७ ॥
वाम भाग
| अध्यायाः | विषयाः | पत्राङ्काः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| १८२ | सप्तमस्य वैवस्वतस्य मनोरीक्ष्वाकादिपुत्राणामाश्रयादिसप्तर्षीणांमे-<br>क्रोनपंचाशद्देवानामदितिद्वादशानामपरदेवानांमोजोनाम्नामकस्य<br>शक्रस्य कीर्त्तनं हिरण्याक्षस्य देवारार्तेर्नृहरिरूपेण विष्णुना<br>वधादिकथनञ्च .... .... .... .... | ११६ | २ |
| १८३ | अष्टमस्य भविष्यस्य सावर्णेस्य मनोर्विजयादिपुत्राणामश्वत्थामादि-<br>सप्तर्षीणां सुतपसादिदेवगणानां बलेरिन्द्रस्य तिसृपत्यस्य कीर्त्तनम्,<br>तस्मिन्मन्वन्तरे हिमाचलस्थं नानोलं विष्णुरिति कथञ्च | ११७ | १ |
| १८४ | ब्रह्मपुत्रस्य नवमस्य मनोर्धृतिकेत्वादिपुत्राणां मेधातिथ्यादिसप्त-<br>र्षीणां परादिदेवगणानां विप्रनाम्नो भविष्यदिन्द्रस्य कालकाक्षादि-<br>दैत्यादाणराज्ञो वसुनाम्नश्च धार्मिकत्वाद्विद्याधरोष्णपुत्रतया भावि-<br>कालकालकाक्षवधः .... .... .... | ,, | २ |
| १८५ | धर्मपुत्रस्य दशमस्य मनोः सुक्षेत्रादिपुत्राणामापोमूत्र्यादिसप्तर्षीणां<br>प्राणाख्यादिदेवगणानामिन्द्रस्य शान्त्याख्यस्य तद्विद्विषां प्रबलस्य<br>वालिनो विष्णुकर्त्तृकं हननम् .... .... .... | ,, | ,, |
| १८६ | रुद्रपुत्रस्यैकादशस्य मनोः सर्वत्रगादिपुत्राणां हविष्मदादिसप्तर्षीणां<br>निर्विष्यादिदेवगणानामिन्द्रस्य वृषाभिधयस्य द्विषन्तं दशग्रीवं विष्णुः<br>कूर्मं रूपमाश्रितां वधिष्यति । .... .... | ,, | ,, |
| १८७ | द्वादशस्य मनोर्दक्षपुत्रस्य देववर्षादिपुत्राणां सतमादिसप्तर्षीणां सुश-<br>र्मादिदेवगणानामिन्द्रस्यानभि नरकं नपुंसकरूपं विष्णुर्हन्ता | ,, | ,, |
| १८८ | त्रयोदशस्य रौच्यस्य मनोश्चित्रसेनादिपुत्राणां धृतिमदादिसप्तर्षीणां |
दक्षिण भाग
अनु०
| अध्यायाः | विषयाः | पत्राङ्काः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| (१८८) | सुत्रामादिदेवगणानामिन्द्रस्य वृहस्पतेरुपदेशमासाद्य त्रिदिवमय मातृ-<br>रूपविष्णुना विनाशः .... .... .... | ११८ | १ |
| १८९ | चतुर्दशस्य भौत्यस्य मनोस्तनूगंभीरादिपुत्राणामभीव्रादिसप्त-<br>र्षीणां चाक्षुषादिदेवगणानां शुचेरिन्द्रस्य शत्रूणां राज्ञो महासुखस्य<br>समर्थे दिव्यवर्षसहस्रपर्य्यन्तं देवासुरयुद्धे जाते तामसीमायाया मधु-<br>सूदनो रोधयिष्यति । .... .... .... | ,, | २ |
| १९० | प्रतियुगं यथार्थं विष्णोरेकतावतारधारणम् .... .... | ,, | ,, |
| १९१ | शक्रप्रश्नानुरोधेन शाम्बरयन्त्राण्या यावज्जवं मासतन्त्रप्रपूजनेन स्वस्या-<br>अतीतानागतमन्वन्तरेषु तत्तद्गहज्ञानम् .... .... | ११९ | १ |
| १९२ | श्रीविष्णोः स्तुतिमाहात्म्यवर्णनम् .... .... | ,, | २ |
| १९३ | देवलसुत्यवशात् हाहाहूहूयोर्गजनक्रत्वीभवनम् .... .... | ,, | ,, |
| १९४ | जम्बूद्वीपे त्रिकूवाति कुलाचले हाहागन्धर्वेण हस्तित्वेन हूहू गन्धर्वेण<br>च नक्रत्वेनोभयाह जलं पातुंममत्सराति प्रविष्टं गजराजं रोद्रेण<br>ग्राहेण तस्य ग्रहणं मिथो युद्धे गजराजेन पुण्डरीकाहृतकमलपुष्पेण<br>विष्णोर्मामंनिसमर्पणर्या व्यथार्त तत्त्वावकृतो विष्णुः सगमि तन्त्रा-<br>त्रियं कस्तपायिचनाभवापि गन्धर्वतानमथयत एतन्अध्यायपठन-<br>फलम् .... .... .... .... | ,, | ,, |
| १९५ | सर्वदुष्टापशमनं विष्णुप्रशस्त्रस्तोत्रम् .... .... | १२१ | १ |
| १९६ | ब्रह्मणा त्रिपुरं जिघांसोः शङ्करस्य सहाय. वार्योशीन च बलं<br>जिघांसोः शक्रस्य सहायं निक्षिपतस्य विष्णुरङ्गजन्मत्रय<br>कथनम् .... .... .... .... | ,, | ,, |