विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)

विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)
Vishnudharmottara Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (सम्पादक: डॉ. प्रियबाला शाह) द्वारा
स्रोत: Sri Vishnu Dharmottara Mahapuranam 1000p Classic Edition (उद्गम)
DevanagariHindipublished1,001 पृष्ठ
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| कारादिक्रान्तिक्षामिनष्टेति वरुणकुवेरनेत्राभ्यां न्यसेत, यथाक्तारूपं ध्यायेत् । "ॐनमो भगवते वासुदेवायत्यनेन" ॐनमो नागयणेत्यनेन वा संविधि पूजयंत .... .... | ४६१ | २ | ३०७ | नागमंत्रानपुरस्सरं नारगादिविषूचपमानशान्तये क्कते निदेशः .... | १७० | १ | |
| ३०८ | लिङ्गमोटननृसिंहवर्णनम् .... .... .... | २ | |||||
| ३५५ | श्रीमन्नृसिंहस्तोत्रवर्णनम् .... .... | १७१ | १ |
॥ इत्यनुक्रमणिका समाप्ता ॥
केके ह्यपूर्वविषयाः प्रतिपादिता न धर्मांतरेऽत्र महितै किल विष्णुपूर्व्वे ॥
तस्यातिसूक्ष्मविषयप्रतिपादकंच वोऽनुक्रमोऽकृत मया तनुबुद्धिभाजा ॥ १ ॥
सर्व्वांतरस्थितमहामहिमप्रतीतः सर्व्वेश्वरः सकलवाञ्छितसिद्धिदाता ॥
लक्ष्मीसहाय उरुगाययशाः प्रसीदेदित्यं प्रयाचति हृदा हरिदत्तशर्म्मा ॥ २ ॥