विवेकचूड़ामणि (हिन्दी अनुवाद सहित)
Viveka Chudamani with Hindi Translation - Gita Press
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (उद्गम)
पृष्ठ 50, कुल 153 में से
संदर्भ में पढ़ेंविज्ञानमय कोश बुद्धिर्बुद्धीन्द्रियैः सार्धं सवृत्तिः कर्तृलक्षणः। विज्ञानमयकोशः स्यात्पुंसः संसारकारणम्॥ १८६॥ ज्ञानेन्द्रियोंके साथ वृत्तियुक्त बुद्धि ही कर्तापनके स्वभाववाला विज्ञानमय कोश है, जो पुरुषके [ जन्म-मरणरूप ] संसारका कारण है। अनुव्रजच्चित्प्रतिविम्बशक्ति- र्विज्ञानसंज्ञः प्रकृतिर्विकारः। ज्ञानक्रियावानहमित्यजस्रं देहेन्द्रियादिष्वभिमन्यते भृशम्॥ १८७॥ चित्त और इन्द्रियादिका अनुगमन करनेवाली चेतनकी प्रतिविम्बशक्ति ही 'विज्ञान' नामक प्रकृतिका विकार है। वह 'मैं ज्ञान और क्रियावान् हूँ' ऐसा देह-इन्द्रिय आदिमें निरन्तर अभिमान किया करता है। अनादिकालोऽयमहंस्वभावो जीवः समस्तव्यवहारवोढा। करोति कर्माण्यपि पूर्ववासनः पुण्यान्यपुण्यानि च तत्फलानि॥ १८८॥ भुङ्क्ते विचित्रास्वपि योनिषु व्रज- न्नायाति निर्यात्यध ऊर्ध्वमेषः। अस्यैव विज्ञानमयस्य जाग्रत्- स्वप्नाद्यवस्था सुखदुःखभोगः॥ १८९॥ देहादिनिष्ठाश्रमधर्मकर्म- गुणाभिमानं सततं ममेति। विज्ञानकोशोऽयमतिप्रकाशः प्रकृष्टसान्निध्यवशात्परात्मनः। अतो भवत्येष उपाधिरस्य यदात्मधीः संसरति भ्रमेण॥ १९०॥