बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
DevanagariHindipublished350 पृष्ठ
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आकस्मिक रेखाएं ११. आकस्मिक रेखाएं : ये रेखाएं समय-समय पर बनती रहती हैं तथा अच्छे और बुरे समय को प्रदर्शित करती रहती हैं। ये रेखाएं स्थायी नहीं होती वरन् इनका क्षणिक प्रभाव समाप्त हो जाता है तो ये रेखाएं मिट जाती हैं। ये रेखाएं हथेली पर कहीं पर भी बन सकती हैं और बनकर मिट सकती हैं।
१२. उच्च पद रेखा : यह रेखा मणिबन्ध से प्रारम्भ होकर केतु क्षेत्र की ओर जाती दिखाई देती है। यदि यह रेखा गहरी और स्पष्ट हो तो व्यक्ति निश्चय ही उच्च पद प्राप्त करता है। उच्च पद रेखा
ऊपर मैंने प्रधान तथा गौण रेखाओं का स्थान तथा उनका संक्षिप्त परिचय दिया है। अब आगे के पृष्ठों में मैं इनसे सम्बन्धित कुछ और तथ्य स्पष्ट कर रहा हूं :