बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १०६ ) ३७. निम्न मंगल की ओर जाती हुई रेखाएं—क्रोध में आत्महत्या । ३८. मंगल पर्वत की ओर जाती हुई रेखाएं—प्रेम के कारण युवावस्था में बदनामी । ३६. शुक्र पर्वत की ओर अंदर की ओर जाती हुई रेखाएं—प्रेम-भंग । ४०. जीवन रेखा को कई स्थानों पर काटती हुई रेखाएं—पारिवारिक जीवन में पूर्ण असफलता । ४१. जीवन रेखा को काटकर भाग्य रेखा तक जाने वाली रेखा—व्यापार में पूर्ण असफलता । ४२. जीवन रेखा को काटकर मस्तिष्क रेखा की ओर जाती हुई रेखा— पागलपन । ४३. जीवन रेखा को काटकर हृदय रेखा की ओर जाती हुई रेखा—हृदयरोग से पीड़ित । ४४. जीवन रेखा तथा हृदय रेखा को काटती हुई रेखा—प्रेम कार्यों में असफलता । ४५. हृदय रेखा की ओर जाने वाली रेखा के अन्त में द्वीप—दुखपूर्ण वैवाहिक जीवन । ४६. जीवन रेखा और सूर्य रेखा को काटती हुई रेखा—सामाजिक पतन । ४७. शुक्र पर्वत तथा जीवन रेखा पर नक्षत्र का चिह्न—घरेलू झगड़े । ४८. सूर्य रेखा तथा जीवन रेखा पर नक्षत्र—दुखमय घरेलू जीवन । ४६. मस्तिष्क हृदय रेखा तथा जीवन रेखा पर चिह्न—रोगपूर्ण जीवन । ५०. भाग्य रेखा तथा जीवन रेखा पर त्रिकोण—आर्थिक हानि । ५१. सूर्य रेखा तथा जीवन रेखा पर त्रिकोण—अपराधपूर्ण जीवन ।