बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १०८ ) दूसरे प्रकार की मस्तिष्क रेखा का उद्गम जिस हथेली में दिखाई देता है ऐसा व्यक्ति निश्चय ही जीवन में महत्त्वपूर्ण पद प्राप्त करता है । ऐसे व्यक्ति के जीवन के कार्य और विचार में परस्पर पूर्ण सामंजस्य रहता है, और वह समय पड़ने पर शीघ्र निर्णय लेने वाला एवं अवसर को भली प्रकार से पहिचानने वाला होता है । ऐसा व्यक्ति कुशाग्र बुद्धि वाला होता है तथा बात के मर्म तक शीघ्र ही पहुंचने में सक्षम होता है । यात्राओं के माध्यम से यह व्यक्ति जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त करता है । जिसके हाथ में तीसरे प्रकार की मस्तिष्क रेखा का उद्गम होता है ऐसा व्यक्ति प्रबल आत्मविश्वासी होता है, तथा अपना कार्य निकालने में वह बहुत अधिक चतुर एवं योग्य होता है । जीवन में आय के स्रोत एक से अधिक होते हैं । यद्यपि कई बार इनके मन में हीनभावना आ जाती है परन्तु फिर भी यह अपने पुरुषार्थ के माध्यम से जीवन में सफल हो जाता है । चौथे प्रकार की मस्तिष्क रेखा का उद्गम जिन व्यक्तियों के हाथों में होता है उनके जीवन में कई बार विदेश यात्राओं के योग बनते हैं साथ ही वह विदेश में व्यापार कर विशेष धन लाभ करता है। ऐसे व्यक्ति भौतिक दृष्टि से पूर्ण सफल होते देखे गये हैं । जिन व्यक्तियों के हाथों में पांचवें प्रकार की मस्तिष्क रेखा का उद्गम होता है वे व्यक्ति कठोर, निर्दयी एवं भावनाशून्य होते हैं। एक प्रकार से इन व्यक्तियों के पास हृदय नाम की कोई वस्तु नहीं होती । अधिकतर अपराधियों के हाथ में इस प्रकार का उद्गम सहज ही देखने को मिल जाता है । यदि इस प्रकार के हाथों में मात्र मस्तिष्क रेखा ही हो और हृदय रेखा दिखाई न दे या हाथ में मस्तिष्क रेखा तथा हृदय रेखा परस्पर मिल गई हो या एक दूसरे से लिपट गई हो तो ऐसा व्यक्ति जीवन में कई हत्याएं करता है तथा भयंकर डाकू बनता है । वस्तुतः हस्तरेखा विशेषज्ञ को हाथ देखते समय मस्तिष्क रेखा के उद्गम पर विशेष विचार करना चाहिए, और उस उद्गम को देखकर उसके अनुसार अपनी धारणा बनानी चाहिए । क्योंकि मस्तिष्क रेखा का प्रारम्भ कई नए तथ्यों को स्पष्ट करता है । आगे की पंक्तियों में मस्तिष्क रेखा से सम्बन्धित अन्य तथ्य स्पष्ट कर रहा हूं : १. यदि मस्तिष्क रेखा से कोई पतली रेखा गुरु पर्वत की ओर जा रही हो, तो वह व्यक्ति योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने वाला तथा बुद्धिमान होता है । २. यदि यह रेखा सीधी, स्पष्ट, और निर्दोष हो तो वह व्यक्ति तुरन्त निर्णय लेने वाला, क्रियाशील मस्तिष्क का धनी तथा बुद्धिमान व्यक्ति होता है । ३. यदि मस्तिष्क रेखा तथा जीवन रेखा का उद्गम अलग-अलग हो तो ऐसा