बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
पृष्ठ 159, कुल 350 में से
संदर्भ में पढ़ें( १५८ ) ६. विज्ञान रेखाएं : जिस प्रकार बुध पर्वत के बगल में सन्तान रेखाएं होती हैं वहीं पर विज्ञान रेखाएं भी होती हैं। यदि बुध पर्वत पर पांच खड़ी रेखाएं हों तो वे विज्ञान रेखाएं कहलाती हैं। जिन व्यक्तियों के हाथों में ये रेखाएं होती हैं वे या तो स्वयं प्रसिद्ध वैज्ञानिक होते हैं अथवा विज्ञान से सम्बन्धित पुस्तकों के लेखन के माध्यम से वे धन, यश तथा सम्मान प्राप्त करते हैं। ऐसे व्यक्ति तुरन्त निर्णय लेने वाले चतुर तथा परिश्रमी होते हैं। [चित्र-शीर्षक: विज्ञान-रेखाएं] १०. यात्रा रेखाएं : यात्रा रेखाएं वे कहलाती हैं जो व्यक्ति को यात्रा करने के लिए बाध्य कर देती हैं तथा यात्रा के माध्यम से सफलता प्राप्त करते हैं। यदि कोई रेखा मंगल क्षेत्र से निकल कर जीवन रेखा पर मिलती हो और मध्यमा उंगली के नाखून पर सफेद अर्द्ध- चन्द्र हो तो वह व्यक्ति जीवन में कई बार यात्राएं करता है। यदि मध्यमा उंगली के नाखून पर अर्द्धचन्द्र हो और वह लगभग तीन महीने तक रहे साथ ही इन्द्र क्षेत्र से निकल कर कोई रेखा सूर्य पर्वत पर पहुंचती है तो वह व्यक्ति निश्चय ही वायुयान से विदेश यात्रा करता है। [चित्र-शीर्षक: यात्रा रेखाएं] यदि शुक्र पर्वत से कोई रेखा धनुष के समान चन्द्र पर्वत पर पहुंचती हो तथा मध्यमा उंगली पर सफेद अर्द्धचन्द्र हो तो पानी के जहाज से वह व्यक्ति विदेश यात्रा करता है। यदि चन्द्र क्षेत्र पर बराबर लम्बी दो रेखाएं ऊपर की ओर उठ रही हों तो वह व्यक्ति निश्चय ही यात्रा करता है। यदि शुक्र क्षेत्र से तथा प्रजापति क्षेत्र से भी दो समानान्तर रेखाएं ऊपर की ओर बढ़ती हों तो निश्चय ही वह व्यक्ति यात्रा करता है ।