भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( १५ ) १. जब भी आपके पास कोई व्यक्ति अपना हाथ दिखाने के लिए आये तो आपको चाहिए कि आप उसके हाथ का स्पर्श न करें क्योंकि आपके स्पर्श करने से आपके शरीर की विद्युत धारा से उसकी विद्युत धारा का सम्पर्क हो जाएगा और उस व्यक्ति के हाथ की मौलिकता समाप्त हो जाएगी। इसलिए हाथ को देखते समय आप अपने हाथ समेटे रहें। २. सबसे पहले उस व्यक्ति के दोनों हाथों को उल्टा करके देखना चाहिए क्योंकि हाथ को उल्टा करने से अर्थात् हथेलियां जमीन की ओर रहने से आप उसके हाथ के आकार को भली प्रकार से समझ सकेंगे कि यह हाथ वर्गाकार है अथवा चौकोर है अथवा किस प्रकार का हाथ मेरे सामने प्रस्तुत हुआ है। ३. जब हाथ का प्रकार ज्ञात हो जाए तो उसे दोनों हाथ सीधे करने के लिए कहिये और दोनों हाथ सीधे होने पर उसके मणिबन्ध से देखते-देखते ऊपर की ओर आना चाहिए। ४. इसके बाद पर्वत, पर्वत के उभार, पर्वत से जुड़ी हुई उंगलियां और अंगूठे को देखना चाहिए। अन्त में उसकी उंगलियों के अग्र भाग और नाखूनों का निरीक्षण करना चाहिए। ५. इस प्रकार हाथ का अध्ययन बिना स्पर्श किये ही कर लेने के बाद उसके हाथ को छूना चाहिए और पूरे हाथ के जोड़ों को ध्यान में रखना चाहिए। हाथ के जोड़ अर्थात् हथेली के जोड़ों से ग्रहों के भागों का भली भांति अध्ययन हो जाता है। उंगलियों के जोड़ों से भी कई तथ्य स्पष्ट हो जाते हैं। हाथ का स्पर्श आपको इस बात का भी आभास दे देगा कि वह हाथ नरम है या कठोर, लचीला है अथवा सख्त। हाथ की कोमलता और कठोरता भी हस्तरेखा विशेषज्ञ के लिए अत्यधिक महत्व रखती है। ६. मणिबन्ध की रेखाओं का भी हस्तरेखा विशेषज्ञ के लिए महत्व होता है और उनका भी अध्ययन कर लेना चाहिए। ७. इसके बाद हथेली पर पाये जाने वाले पर्वत, पर्वतों के उभार, व दबाव साथ ही पर्वतों से जुड़ी हुई रेखाएं, दो पर्वतों की संधियां तथा उन पर पाये जाने वाले सूक्ष्म चिह्नों का भी अध्ययन करना चाहिए। ८. अन्त में उंगलियों के सिरों पर शंख, चक्र आदि दिखाई देते हैं, वे भी अपने आप में बहुत अधिक महत्व रखते हैं। अतः उनका भी अध्ययन आवश्यक है। हाथ देखने की विधि १. यों तो हाथ किसी भी समय देखा जा सकता है परन्तु इसके लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल का होता है जबकि दिखाने वाले ने भोजन या नाश्ता न किया हो।