भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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त्रैलोक्याधिपतिर्बल भुवन कारकाय सर्वसत्व हिताय, निज भक्ताय अभीष्ट फल प्रदाय, भवत्याधीनाय सुरासुरेन्द्रादि मुकुटकोटि धृष्टपाद पीठाय अनन्त युग नाथाय, देवाधि- देवाय, धर्मचक्राधीश्वराय, सर्व विद्या परमेश्वराय, कुविद्याविघ्न प्रदाय, तत्पादपंकजा श्रयानि भवनी देवी सासन देवते त्रिभुवन संक्षोमनी, त्रैलोक्य शिवापहारकरिणीं श्री अद्भुत भ्रातवेदा श्री महालक्ष्मी देवी (अमुकस्य) स्थावर जंगम कृत्रिम विषमूल संहारिणी सर्वाभिचार कर्मापहारिणीं परविद्योच्छेदनी परमंत्र प्रनाशिनीं भ्रष्टमहानाम कुलीञ्चाटनीं कालदष्ट्रं मृत कोत्यापिनीं (अमुकस्य) सर्वरोग प्रमोचनीं, ब्रह्मा विष्णु रुद्रेन्द्र चन्द्रादित्यादिग्रह नक्षत्रोत्पात मरण भय पीड़ा मर्द्दिन त्रैलोक्य विश्वलोक वशंकरि, भुविलोक हितकं महाभैरवि शस्त्रोपचारिणीं रौद्र, रौद्ररूप धारी प्रसिद्ध सिद्ध विद्याधर यक्ष राक्षस गरुड़ गन्धर्व किन्नर किं पुरुषो दैत्योरेन्द्र पूजिते ज्वालापात कराल दिगंतराले महावृषभ वाहिनीं, खेटक कृपाण त्रिशूल शक्ति चक्रपाश शरासन शिव विराजमान षोडशाद्व मुजे एहि एहि लं ज्वाला मालिनीं ह्रीं ह्रीं ब्रूं ह्ली हीं हूं हौं ह्रः देवान् आकर्षय आकर्षय नाग ग्रहान् आकर्षय आकर्षय यक्ष ग्रहान् आकर्षय आकर्षयः गंधर्व ग्रहान् आकर्षय आकर्षय ब्रह्मग्रहान् आकर्षय आकर्षय राक्षस ग्रहान् आकर्षय आकर्षय भूत ग्रहान आकर्षय आकर्षय दिव्यतर ग्रहान् आकर्षय आकर्षय चतुराणि जैंन्य मार्ग ग्रहान् आकर्षय आकर्षय चतुर्विशति जिन ग्रहान् आकर्षय आकर्षय सर्व जटिल ग्रहान् आकर्षय आकर्षय अखिल मुंडित ग्रहान् आकर्षय जंगम ग्रहान् आकर्षय आकर्षय सर्व दुर्गशादि विद्याग्रहान् आकर्षय आकर्षय सर्व नग निग्रह वासी ग्रहान् आकर्षय आकर्षय सर्व जलाशय वासी ग्रहान् आकर्षय आकर्षय सर्वस्थल वासी ग्रहान् आकर्षय आकर्षय सर्वतिस्थि ग्रहान् आकर्षय आकर्षय सर्व श्मशान वासी ग्रहान् आकर्षय आकर्षय सर्व पवनी वासी ग्रहान् आकर्षय आकर्षय सर्व धर्म शापादि गौ शाप ग्रहान् आकर्षय आकर्षय सर्व गिरिगुहा दुर्गवासी ग्रहान् आकर्षय आकर्षय श्रापित् ग्रहान् आकर्षय आकर्षय सर्व दुष्ट ग्रहान् आकर्षय आकर्षय वक्र पिंड ग्रहान् आकर्षय आकर्षय कट कट कंपय कंपय शीर्षं चालय शीर्षं चालय गात्रं चालय गात्रं चालय बाहुं बाहुं चालय पादं चालय कर पल्लवान चालय बाहुं चालय पादं चालय पादं चालय कर पल्लवान चालय कर पल्लवान चालय सर्वांगचालय सर्वांगचालय लोलय धुन धुन कंपय कंपय शीघ्रं भव तारय तारय प्रहि प्रहि ग्राह ग्राह भक्षय अक्षय आवेशेय प्रावेशेय ज्वलू ज्वालामालिनीं ह्रां वक्रीं ब्लू द्रां द्रां ज्वल ज्वल र र र र र र र प्रज्वल प्रज्वल धग धग धूमाक्ष करणीं ज्वल विशेषय विशेषय देवग्रहान् दह दह नाग ग्रहान् दह दह यक्ष ग्रहान् दह दह गंधर्व ग्रहान् दह दह ब्रह्म ग्रहान् दह दह राक्षस ग्रहान् दह दह भूत प्रहान् दह दह दिव्यन्तर ग्रहान् दह दह चतुराशि जैंन्य मार्ग ग्रहान् दह दह चतुर्विश जिन ग्रहान् दह दह सर्व जटिल ग्रहान् दह दह अखिल मुंडित ग्रहान् दह दह जंगम ग्रहान् वह दह सर्व दुर्गशादि विद्या ग्रहान् वह दह सर्व नवनिग्रह बासी