बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २४० ) मित्रों का इसके जीवन में पूरा-पूरा सहयोग रहता है । बुढ़ापा बहुत अधिक सुखमय व्यतीत होता है और ऐसा व्यक्ति अपने ही प्रयत्नों से जीवन में सफलता प्राप्त करता है । यदि स्त्री के हाथ में यह योग हो तो उसका विवाह अत्यन्त उच्चस्तर के व्यक्ति से होता है तथा ऐसी स्त्री आचरण शील समाज में सम्मान प्राप्त करने वाली होती है । मोक्ष प्राप्ति योग : परिभाषा : यदि गुरु पर्वत विकसित हो तथा गुरु रेखा अपने पर्वत से प्रारम्भ होकर सूर्य पर्वत तक जाती हो तो मोक्ष प्राप्ति योग होता है । फल : यह योग जिस व्यक्ति के हाथ में होता है मृत्यु के पश्चात् उस व्यक्ति की सद्गति होती है । टिप्पणी : हिन्दू धर्म शास्त्र के अनुसार मोक्ष प्राप्ति उत्तम स्थिति मानी जाती है । ऐसा व्यक्ति तभी हो सकता है जब वह अपने जीवन में सदाचारी धर्मात्मा तथा पुण्य करने वाला हो । साथ ही उस पर ईश्वर की पूरी-पूरी कृपा हो । जो व्यक्ति मोक्ष प्राप्त कर लेता है वह आवागमन के बन्धनों से छूट जाता है और उसका जीवन प्रभु के चरणों में समर्पित हो जाता है । ऐसा व्यक्ति अपने जीवन में ईश्वर पर पूरी आस्था रखने वाला न्यायपथ पर चलने वाला, ईश्वर भक्त, सदाचारी, परोपकारी कुलीन, एवं सत्यनिष्ठ होता है । अस्वाभाविक मृत्यु योग : परिभाषा : जिस व्यक्ति के दोनों हाथों में जीवन रेखा पर क्रॉस का चिन्ह हो तो उस व्यक्ति की अस्वाभाविक मृत्यु होती है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है उसकी मृत्यु स्वाभाविक नहीं होती । टिप्पणी : सामुद्रिक शास्त्र के विद्वानों ने ऊपर लिखे योग के अलावा निम्न योगों को भी अस्वाभाविक मृत्यु योग बताया है । १. यदि जीवन रेखा बीच में टूटी हुई हो । २. यदि जीवन रेखा के प्रारम्भ में तारे का चिन्ह हो ।