बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २५५ ) चामर योग : परिभाषा : यदि हाथ की उंगलियां लम्बी हों तथा उस पर नाखून रक्तिम आभा लिए हुए हो साथ ही सूर्य रेखा लम्बी पुष्ट हो तथा उसका उद्गम मणिबन्ध से हुआ हो । इसके साथ ही भाग्य रेखा का उद्गम भी मणिबन्ध से हुआ हो और दोनों रेखाए उद्गम स्थान पर मिली हुई हों तो चामर योग होता है । फल : इस योग में जन्म लेने वाला मनुष्य अत्यन्त उच्च प्रतिष्ठित एवं विद्वान लोगों के द्वारा पूजा जाता है तथा वह स्वयं भी अपने आप में विद्वान होता है और विद्वता के [चामर योग] कारण ही वह देश तथा विदेश में सम्मानित होता है। ऐसा व्यक्ति अपने ही परिश्रम से सफल होता है और अपनी सफलता के बल पर यश उपार्जित करता है । टिप्पणी : इस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति दीर्घायु भी होता है। यहां दीर्घायु से मेरा तात्पर्य ७० से १०० वर्ष के बीच की आयु का व्यतीत करना है । मालिका योग : परिभाषा : यदि हाथ में राहु केतु को छोड़कर अन्य सभी ग्रहों से सम्बन्धित पर्वत बलवान और पुष्ट हों तो मालिका योग होता है । फल : यदि हथेली में मालिका योग हो तो ऐसा व्यक्ति राज्य में उच्चे पद पर स्थापित होता है तथा वह नेतृत्व के कारण समाज में सम्मानित होता है । यहां सात ग्रहों से तात्पर्य सूर्य, चन्द्र, मंगल बुध, गुरु, शुक्र, तथा शनि है । परन्तु इसमें ध्यान रखने की [मालिका योग] बात यह है कि प्रत्येक पर्वत का एक मध्य बिन्दु होता है और यदि उस ग्रह से संबन्धित रेखा उस मध्य बिन्दु को भली प्रकार से स्पष्ट कर रही हो अर्थात् उस मध्य बिन्दु को स्पर्श कर रही हो तो वह ग्रह सर्वाधिक बलवान माना जाता है । हाथ में इन सातो ग्रहों में से जो ग्रह सबसे अधिक बलवान हो तो उस ग्रह से सम्बन्धित मालिका योग समझना चाहिए । उदाहरण के लिए यदि गुरु पर्वत के मध्य बिन्दु पर गुरु रेखा स्पर्श कर रही हो तो अन्य पर्वतों की अपेक्षा गुरु पर्वत ज्यादा श्रेष्ठ माना जायेगा और ऐसा होने पर उस हाथ में गुरु मालिका योग कहलाएगा । इसी प्रकार सूर्य मालिका योग, चन्द्र मालिका योग आदि हो सकते हैं । इनसे संबंधित फल इस प्रकार से हैं :