भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( २७६ ) हर्ष योग : परिभाषा : यदि हथेली के मध्य में चन्द्र पर्वत और ऊर्ध्व रेखा के बीच में तिल का चिह्न हो तो हर्ष योग होता है । फल : हर्ष योग वाला व्यक्ति भाग्यवान गुणी, चतुर, दृढ़, तथा प्रसिद्ध होता है । प्रवृज्या योग : परिभाषा : यदि आयु रेखा पर त्रिकोण का चिह्न हो तो प्रवृज्या योग होता है । फल : जिस व्यक्ति के हाथ में प्रवृज्या योग होता है वह किसी साधु से दीक्षा ले लेता है और गृहस्थ छोड़कर सन्यासी बन जाता है । टिप्पणी : विद्वानो ने निम्नलिखित योग भी प्रवृज्या योग से संबंधित माने हैं : १. यदि सूर्य रेखा पर त्रिकोण का चिह्न हो । २. यदि पूरा हाथ लचकदार हो । सभी उंगलियां लम्बी और सुन्दर हों तथा भाग्य रेखा पर त्रिकोण का चिह्न हो । ३. यदि बुध पर्वत के नीचे त्रिकोण या जाल हो । ४. यदि संतान रेखाओं एवं प्रणय रेखाओं पर जाल का चिह्न हो । शुक्र योग : परिभाषा : यदि शुक्र पर्वत बलवान पुष्ट, उठा हुआ तथा सुन्दर हो एवं उस पर बाधक रेखाओं का जाल न हो तो शुक्र योग होता है । फल : शुक्र याग वाला व्यक्ति धनवान, विद्वान विख्यात तथा कीर्तिवान होता है । ऐसा व्यक्ति दीर्घायु तथा सुखी परिवार से युक्त होता है ।