भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 303, कुल 350 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 303

( ३०२ ) मरुत्वेग योग : परिभाषा : यदि मात्र दाहिने हाथ में चारों उंगलियो पर शंख के चिह्न हों तो मरुत्वेग योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह जीवन में कई विदेश यात्राएं करता है तथा समाज में पूर्ण सम्मानित जीवन व्यतीत करता है । (चित्र: मरुत्वेग योग) वायु योग : परिभाषा : यदि दाहिने हाथ की चारों उंगलियों पर चक्र का चिह्न हो तो ऐसा योग कहलाता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति शुभ कार्यों को करने से एवं धार्मिक कार्यों में रुचि लेने से समाज मे सम्मान प्राप्त करता है तथा निरन्तर उन्नति करता रहता है । (चित्र: वायु योग) प्रभन्जन योग : परिभाषा : जिसके दाहिने हाथ में तीन उंगलियों पर चक्र के चिह्न हों तो प्रभन्जन योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वे व्यक्ति जीवन में उन्नति करते हैं तथा व्यापार के कार्यों से विदेश यात्रा करते हैं । (चित्र: प्रभंजन योग)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक) · पृष्ठ 303, कुल 350 में से · BharatKosha