बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ५२ ) १. तीखे २. चपटे ३. नोकीले ४. वर्गाकार कई बार यह देखने में आया है कि सभी उंगलियों के अग्र भाग एक समान ही होते हैं और कई बार अलग-अलग उंगलियों के अग्रभाग अलग-अलग प्रकार के होते हैं। अब मैं सामान्य रूप से इनका वर्णन स्पष्ट कर रहा हूँ : १. तीखी उंगलियां :—जिनके हाथों में तीखी उंगलियां होती हैं अथवा जिनके अग्रभाग तीखे होते हैं, वे व्यक्ति अत्यन्त ही श्रेष्ठ तथा समाज में अग्रणी माने जाते हैं। ऐसे व्यक्ति दार्शनिक, कलाकार, संगीतकार, तथा अपनी आत्मा के अनुसार चलने वाले होते हैं । उनके हृदय में घृणा, क्रोध और अविवेक नहीं होता अपितु इनका पूरा हृदय दया, प्रेम, और स्नेह से लबालब भरा होता है । परन्तु अत्यधिक तीखी उंगलियां मस्तिष्क के पागलपन को स्पष्ट करती हैं। ऐसे व्यक्ति केवल कल्पना में ही खोये रहते हैं। इनके जीवन में सफलता कम ही रहती है। तांत्रिक लोगों की उंगलिया सामान्यतः ऐसी ही देखने को मिलती हैं। जहां तक देखा गया है, यह अनुभव में आया है कि मनुष्यों में वे व्यक्ति ज्यादा उन्नत एवं सभ्य ज्ञात हुए हैं, जिनकी उंगलियों के अग्रभाग सामान्य रूप से तीखे होते हैं। २. चपटी उंगलियां :—चपटी उंगलियां कार्यकुशलता तथा फुर्ती की सूचक होती हैं। ऐसे व्यक्ति अपने कार्यों में बराबर लगे रहते हैं तथा किसी भी कार्य को बीच में नहीं छोड़ते । जब तक कोई कार्य भली प्रकार से सम्पन्न नहीं हो जाता तब तक ये विश्राम नहीं लेते । इनमें भरपूर आत्म-विश्वास होता है और अपने आत्म-विश्वास के बल पर ही कार्यों को पूर्णता की ओर पहुंचाते हैं । ऐसे व्यक्ति सफल युद्ध विशारद, संगीतकार, कुशल कारीगर, कुशल खिलाड़ी तथा श्रेष्ठ विद्वान होते हैं । सीखने की इनमें विशेष प्रवृत्ति होती है । इनके जीवन में व्यवस्था और क्रमबद्धता होती है । ऐसे व्यक्ति धर्म के प्रति कट्टर नहीं होते अपितु जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उदारता से काम लेते हैं । वस्तुतः ऐसे व्यक्ति ही अपने कार्यों से अपने समाज को कुछ नया योगदान देने में सफल होते हैं। ३. नुकीली उंगलियां :—ये उंगलियां मानव के सुन्दर विचारों तथा सुन्दर कार्यों की ओर इंगित करती हैं । ऐसे व्यक्ति जो भी कार्य करेंगे वह एक तरीके से करेंगे और उनके कार्यों में एक विशेष प्रकार की व्यवस्था होगी परन्तु ऐसा देखा गया है कि