भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( ६२ ) ८. शुक्र पर्वत :—अंग्रेजी में यह ग्रह 'वीनस' कहलाता है। सुन्दरता, प्रेम, शान-शौकत, तथा ऐश्वर्य-भोग आदि का संबंध इसी ग्रह से है। ९. मंगल पर्वत :—यह अंग्रेजी में 'मार्स' के नाम से पुकारा जाता है। युद्ध जीवट, शक्ति, परिश्रम, पुरुषोचित्त गुण आदि का अध्ययन इस ग्रह के माध्यम से किया जाता है। १०. राहू पर्वत :—इसको अंग्रेजी में 'ड्रैगन्स हेड' के नाम से पुकारते हैं। आकस्मिक धन-प्राप्ति, लॉटरी, हार्ट एटेक या अचानक घटित होने वाली घटनाओं का संबंध इसी ग्रह से है। ११. केतु पर्वत :—इसे अंग्रेजी में 'ड्रैगन्स टेल' कहते हैं। हाथ पर इस ग्रह से धन, भौतिक उन्नति एवं बैंक बैलेन्स आदि का अध्ययन किया जाता है। १२. प्लूटो पर्वत :—इसे अंग्रेजी में 'प्लूटो' तथा हिन्दी में इन्द्र के नाम से पुकारते हैं। मानसिक चिन्ता तथा अध्यात्मिक उन्नति के बारे में इसी ग्रह से जान सकते हैं। ग्रहों का क्षेत्र : हस्तरेखा विज्ञान में हथेली में समस्त ग्रहों के स्थान निर्धारित हैं और सूक्ष्म दृष्टि से देखने पर इनको पहचाना जा सकता है। १. बृहस्पति :— हथेली में इसका स्थान तर्जनी उंगली के मूल में तथा मंगल पर्वत से ऊपर होता है। यह स्वभाव से अधिकार, नेतृत्व, संचालन तथा लेखन का देवता विशेष रूप से माना गया है। गुरु का पर्वत इन तथ्यों को भली प्रकार से स्पष्ट करता है। जिन हथेलियों में गुरु का पर्वत सबसे अधिक उभरा हुआ और स्पष्ट होता है उनमें देव-तुल्य सभी गुण पाये जाते हैं। ऐसा व्यक्ति जहां स्वयं की उन्नति करता है, वहां दूसरों की भी उन्नति देने में सहायक रहता है। ऐसे व्यक्ति अपने स्वाभिमान की रक्षा विशेष रूप से करते हैं। ये विद्वान न्याय करने वाले, अपने वचनों का निर्वाह करने वाले, परोपकारी, तथा समाज में माननीय होते हैं। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी ये सहसा विचलित नहीं होते अपितु देश के जो भी उच्च न्यायाधीश या उच्च पदा- धिकारी व्यक्ति हैं उनमें निश्चय ही गुरु पर्वत विकसित अवस्था में होना चाहिए। ऐसे लोगों में यह विशेष क्षमता होती है कि वे जनता को अपने विचारों के अनुकूल बना लेते हैं। इनमें धार्मिक भावनाएं जरूरत से ज्यादा होती हैं। यदि गुरु पर्वत अल्पविकसित या अविकसित होता है तो उन व्यक्तियों में उपर्युक्त गुणों की न्यूनता समझनी चाहिए। शारीरिक दृष्टि से ये व्यक्ति साधारण डील-डौल के स्वस्थ तथा हंस-मुख होते हैं। वाचन तथा भाषण-कला में ये व्यक्ति पटु