भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( ८६ ) सूर्य का चिन्ह : विशेष सफलता । चन्द्र का चिन्ह : तटवर्ती स्थानों पर व्यापार से लाभ । मंगल का चिन्ह : युद्ध शस्त्र, के व्यापार से सफलता । बुध का चिन्ह : अन्तर्राष्ट्रीय व्यापारी । गुरु का चिन्ह : सफल सामाजिक भावना का विकास । शुक्र का चिन्ह : सो से अधिक स्त्रियों से रमण । शनि का चिन्ह : नपुंसकता । ११. प्लूटो : एक रेखा : जीवन में पूर्ण उन्नति । कई रेखाएं : समाज में विशेष सम्मान । आपस में कटती हुई रेखाएं : सन्यास भावना का विकास । बिन्दु : हर कार्य में असफलता । क्रॉस : आत्महत्या नक्षत्र : धार्मिक कार्यों में रुचि । वर्ग : मूर्खता । वृत्त : शुभ कार्यों में रुचि । त्रिकोण : कई कलाओं में सफलता । जाली : असफल जीवन । सूर्य का चिन्ह : विशेष सम्मान । चन्द्र का चिन्ह : जल में डूबने से मृत्यु । मंगल का चिन्ह : धर्मान्धता । बुध का चिन्ह : व्यापारिक कार्यों में विशेष सफलता । गुरु का चिन्ह : समाज में सम्मानीय स्थान प्राप्त होना । शुक्र का चिन्ह : सात्विक प्रेम । शनि का चिन्ह : तंत्र विद्याओं में रुचि । संक्षेप में आगे की पंक्तियों में ऋणात्मक और घनात्मक पर्वत का विवेचन कर रहा हूं । जिन तारीखो में जन्म होता है उन तारीखों के अनुसार उसके पर्वत का फल उसके जीवन में रहता है । घनात्मक पर्वत होने पर उस पर्वत की विशेषताएं तथा ऋणात्मक पर्वत होने पर उस पर्वत से सम्बन्धित ग्रह की न्यूनताएं मिलती हैं ।