बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ११ ) १३. यदि मस्तिष्क रेखा में से कोई रेखा ऊपर की ओर बढ़ रही हो तो वह व्यक्ति विशेष यश प्राप्त करता है। १४. जंजीरदार रेखा अशुभ मानी गई है। १५. यदि विवाह रेखा जंजीरदार हो तो उसको प्रेम में असफलता मिलती है। १६. यदि मस्तिष्क रेखा जंजीरदार दिखाई दे तो वह व्यक्ति पागल बन जाता है। १७. हथेली में लहरियादार रेखा शुभ फल देने वाली नहीं होती। १८. टूटी हुई रेखाएं अशुभ फल ही देती है। १९. यदि कोई रेखा बहुत अधिक सूक्ष्म और कमजोर हो तो उसका प्रभाव नहीं के बराबर होता है। २०. यदि किसी रेखा के मार्ग में वह द्वीप या कोई चिन्ह हो तो उसे शुभ नहीं समझना चाहिए। २१. यदि रेखा के मार्ग में वर्ग हो तो इससे उस रेखा को बल मिलता है तथा उस रेखा का शुभ फल प्राप्त होता है। २२. यदि रेखा पर कोई बिन्दु हो तो इससे उस रेखा से संबंधित कार्य की हानी होती है। २३. यदि किसी रेखा पर त्रिकोण का चिह्न दिखाई दे तो उस रेखा से संबंधित कार्य शीघ्र ही होना समझना चाहिए। २४. रेखाओं पर तिरछी रेखाएं हानिकारक मानी गई हैं। २५. यदि रेखाओं पर नक्षत्र दिखाई दे तो इससे कार्य सफलता शीघ्र प्राप्त होती है। २६. मोटी रेखाएं व्यक्ति की दुर्बलता को स्पष्ट करती है। २७. पतली रेखाएं व्यक्ति के जीवन में श्रेष्ठ फल देने में समर्थ मानी गई हैं। २८. ढ़लवा रेखाएं व्यक्ति के परिश्रम को तो स्पष्ट करती हैं परन्तु उससे श्रेष्ठ फल मिलने का योग नहीं बनता। २९. यदि कोई गहरी रेखा चलते-चलते बीच में ही रुक जाय या कमजोर पड़ जाय तो ऐसी रेखा दुर्घटना की परिचायक होती है। ३०. रेखा यदि कहीं पर पतली और कहीं पर मोटी हो तो वह शुभ नहीं है और ऐसा व्यक्ति जीवन में कई बार धोखा खायेगा ऐसा समझना चाहिए। ३१. रेखाओं के बारे में सावधानी के साथ विचार करना चाहिए और यदि कोई चिह्न दोनों ही हाथों में दिखाई दे तभी उससे संबंधित भविष्य कथन करना चाहिए।