यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 113, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंपूर्वार्ध नौवां अध्याय अग्ने अच्छा वदेह नः प्रति नः सुमना भव. प्र नो यच्छ सहस्रजित्त्व १४ हि धनदा ऽ असि स्वाहा.. (२८) हे अग्नि! आप हमारे प्रति अच्छा मन रखिए. आप हमारे लिए अच्छी तरह मार्ग निर्देश और उपदेश कीजिए. आप अकेले ही हजारों को जीत सकते हैं. आप धनदाता हैं. आप के लिए स्वाहा. ( २८ ) प्र नो यच्छत्वर्यमा प्र पूषा प्र बृहस्पतिः. प्र वाग्देवी ददातु नः स्वाहा.. (२९) अर्यमा देव, पूषा देव, बृहस्पति देव व वाग् देवी हमारी अभिलाषा पूरी करें. हम आप सब को आहुतियां प्रदान करते हैं. ( २९ ) देवस्य त्वा सवितुः प्रसवेऽश्विनोर्बाहुभ्यां पूष्णो हस्ताभ्याम्. सरस्वत्यै वाचो यन्तुर्यन्त्रिये दधामि बृहस्पतेष्ट्वा साम्राज्येनाभिषिञ्चाम्यसौ.. (३०) सविता देव सब को उपजाने वाले हैं. हम अश्विनीकुमार की बाहु और पूषा देव के हाथों से यज्ञ देव की ऊर्जा को धारण करते हैं. सरस्वती देवी वाणी से नियंत्रित करती हैं. बृहस्पति देव श्रेष्ठ साम्राज्य के नियंत्रक हैं, संचालक हैं. हम आप को सींचते हैं. ( ३० ) अग्निरेकाक्षरेण प्राणमुदजयत्तमुज्जेषमश्विनौ द्व्यक्षरेण द्विपदो मनुष्यानुदजयतां तानुज्जेषं विष्णुस्त्र्यक्षरेण त्रींल्लोकानुदजयत्तानुज्जेष १४ सोमश्चतुरक्षरेण चतुष्पदः पशूनुदजयत्तानुज्जेषम्.. (३१) अग्नि ने एक अक्षर से ऊर्ध्वगामी प्राण पर विजय हासिल की वैसे ही हम भी विजय पाएं. दो अक्षर से अश्विनीकुमारों ने दो पैरों वाले मनुष्यों को जीता. हम भी उस जीत का अनुकरण करें. विष्णु देव ने तीन अक्षरों से तीनों लोकों पर विजय पाई. हम भी उस जीत का अनुसरण करें. सोम ने चार अक्षरों से चौपायों को जीता, उसी प्रकार हम भी उन की कृपा से उस जीत का अनुकरण करें. ( ३१ ) पूषा पञ्चाक्षरेण पञ्च दिश ऽ उदजयत्ता ऽ उज्जेष १४ सविता षडक्षरेण षडृतूनुदजयत्तानुज्जेषं मरुतः सप्ताक्षरेण सप्त ग्राम्यान् पशूनुदजयँस्तानुज्जेषं बृहस्पतिरष्टाक्षरेण गायत्रीमुदजयत्तामुज्जेषम्.. (३२) पूषा देवता ने पांच अक्षरों से पांचों दिशाओं पर विजय पाई, वैसे ही हम भी विजय पाएं. सविता देव ने छह अक्षरों से छह ऋतुओं पर विजय पाई, वैसे ही हम भी विजय पाएं. मरुद्गणों ने सात अक्षरों से सात गांवों और पशुओं पर विजय पाई. बृहस्पति देव ने आठ अक्षरों से गायत्री पर विजय पाई, उसी प्रकार हम भी विजय पाएं. ( ३२ ) यजुर्वेद - ११३