यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 118, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंपूर्वार्ध दसवां अध्याय सरस्वती देवी के लिए स्वाहा. पूषा देव के लिए स्वाहा. बृहस्पति देव के लिए स्वाहा. इंद्र देव के लिए स्वाहा. घोष के लिए स्वाहा. श्लोक के लिए स्वाहा. घोष के लिए स्वाहा. ऐश्वर्य देव के लिए स्वाहा. सौभाग्य देवी के लिए स्वाहा. अर्यमा देव के लिए स्वाहा. सौभाग्य देव के लिए स्वाहा. ( ५ ) पवित्रे स्थो वैष्णव्यौ सवितुर्वः प्रसव ऽ उत्पुनाम्यच्छिद्रेण पवित्रेण सूर्यस्य रश्मिभिः. अनिभृष्टमसि वाचो बन्धुस्तपोजाः सोमस्य दात्रमसि स्वाहा राजस्वः.. ( ६ ) आप पवित्रता में स्थित हैं. आप को विष्णु के लिए पवित्र किया जाता है. आप सविता देव से उत्पन्न होते हैं. पवित्र सूर्य की रश्मियों से छन कर जल आकाश में जाता है. आप को सूर्य पवित्र करने की कृपा करें. वाणी को पवित्र करने की कृपा करें. आप तपशक्ति प्रदाता हैं. आप सोम को राजोचित पात्रता प्रदान कर सकते हैं. आप के लिए स्वाहा. ( ६ ) सधमादो द्युम्निनीराप ऽ एता ऽ अनाधृष्टा ऽ अपस्यो वसानाः. पस्त्यासु चक्रे वरुणः सधस्थमपा ६४ शिशुर्मातृतमास्वन्तः.. ( ७ ) ये स्वर्गलोक के जल हैं. ये जल आनंददायी हैं. ये स्वर्गलोक के जल हैं. ये तेजस्विता प्रदान करने वाले हैं. ये स्वर्गलोक के जल हैं. ये उत्तम वास प्रदान करने वाले हैं. ये स्वर्गलोक के जल हैं. ये धारक हैं. ये स्वर्गलोक के जल हैं. ये माता की तरह पोषक हैं. हम यजमान सादर इन जलों को स्थापित करते हैं. ( ७ ) क्षत्रस्योल्बमसि क्षत्रस्य जरायु्वसि क्षत्रस्य योनिरसि क्षत्रस्य नाभिरसीन्द्रस्य वार्त्रघ्नमसि मित्रस्यासि वरुणस्यासि त्वयायं वृत्रं वधेत्. दृवासि रुजासि क्षुमासि पातैर्नं प्राञ्चं पातैर्नं प्रत्यञ्चं पातैर्नं तिर्यञ्चं दिग्भ्यः पात.. ( ८ ) हे जल! आप क्षत्रियों के गर्भपोषक हैं. आप क्षत्रियों की गर्भ रक्षक झिल्ली हैं. आप इंद्र देव की नाभि हैं. आप वृत्रासुर के नाशक हैं. आप मित्र देव की तरह शत्रुओं का वध करते हैं. आप वरुण देव की तरह शत्रुओं का वध करते हैं. आप शत्रुओं को विदीर्ण देते हैं. आप शत्रुओं को पीड़ा देते हैं. आप शत्रुओं को डरा देते हैं. आप पूर्व दिशा से रक्षा करने की कृपा करें. आप पश्चिम दिशा से ( इस यज्ञ की ) रक्षा करने की कृपा करें. आप उत्तर दिशा से ( इस यज्ञ की ) रक्षा करने की कृपा करें. आप दक्षिण दिशा से ( इस यज्ञ की ) रक्षा करने की कृपा करें. ( ८ ) आविर्मर्या आवित्तो अग्निर्गृहपतिरावित्त ऽ इन्द्रो वृद्धश्रवा ऽ आवित्तौ मित्रावरुणौ धृतव्रतावावित्तः पूषा विश्ववेदा ऽ आविन्ते द्यावापृथिवी विश्वशम्भुवावावित्तादितिरुरुशर्मा.. ( ९ ) सभी आर्य लोग ( इस यज्ञ स्थल की ) रक्षा करने की कृपा करें. गृहपति अग्नि ( इस यज्ञ स्थल की ) रक्षा करने की कृपा करें. यशस्वी इंद्र देव ( इस यज्ञ ११८ - यजुर्वेद