भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 120, कुल 421 में से

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पृष्ठ 120

पूर्वार्ध दसवां अध्याय त्रिणव, त्रयस्त्रिंश, स्तोम रूपी, हेमंत व शिशिर ऋतु रूपी धन आप की रक्षा करें. अनाचारियों को समूल नष्ट करने की कृपा करें. (१४) सोमस्य त्विषिरसि तवेव मे त्विषिर्भूयात्. मृत्योः पाह्योजोसि सहोस्यमृतमसि.. (१५) आप सोम के प्रकाशक व बलशाली हैं. हमारा ऐश्वर्य भी आप के ऐश्वर्य जैसा हो जाए. आप मृत्यु से हमारी रक्षा करने की कृपा करें. हम आप के ही समान अमर हो जाएं. (१५) हिरण्यरूपा ऽ उषसो विरोक ऽ उभाविन्द्रा ऽ उदिथः सूर्यश्च. आरोहतं वरुण मित्र गर्तं ततश्चक्षाथामदितिं दितिं च मित्रोसि वरुणोसि.. (१६) हे मित्र देव! आप सोने जैसे रूप वाले हैं. हे वरुण! आप सोने जैसे रूप वाले हैं. हे मित्र देव! आप उषाओं को प्रकाशित करने वाले हैं. हे वरुण! आप उषाओं को प्रकाशित करने वाले हैं. आप दोनों सूर्य व चंद्र देव की तरह उदित होते हैं. हे मित्र देव!, हे वरुण देव! आप रथ पर चढ़ने की कृपा कीजिए. आप दोनों अदिति, दिति, मित्र व वरुण स्वरूप हैं. (१६) सोमस्य त्वा द्युम्नेनाभिषिञ्चाम्यग्नेर्भ्राजसा सूर्यस्य वर्चसेन्द्रस्येन्द्रियेण. क्षत्राणां क्षत्रपतिरेध्यति दिद्यून् पाहि.. (१७) हे यजमान! हम आप का सोम से अभिषेक करते हैं. हे यजमान! हम आप का अग्नि के तेज से अभिषेक करते हैं. हे यजमान! हम आप का सूर्य के वर्चस्व से अभिषेक करते हैं. हम आप का इंद्र देव के बल से अभिषेक करते हैं. आप क्षत्रियों में क्षत्रपति बनें. आप प्रजा के रक्षक बनें. (१७) इमं देवा ऽ असपत्न ५७ सुवध्वं महते क्षत्राय महते ज्यैष्ठ्याय महते जानराज्यायैन्द्रस्येन्द्रियाय. इमममुष्य पुत्रममुष्यै पुत्रमस्यै विश ऽ एष वोमी राजा सोमोस्माकं ब्राह्मणाना ५७ राजा.. (१८) हे देवगण! शत्रुनाश, श्रेष्ठ कार्य, महान् क्षत्रिय बल, महान् बड़प्पन व महान् जनराज्य हेतु हमें शक्ति प्रदान करने की कृपा करें. हे देवगण! महान् इंद्र देव जैसी क्षमता हेतु हमें शक्ति प्रदान करने की कृपा करें. हे देवगण! अमुक पिता के पुत्र व अमुक माता के पुत्र को शक्ति प्रदान करने की कृपा करें. प्रजा पालन हेतु हमें शक्ति प्रदान करने की कृपा करें. ये सोम हम ब्राह्मणों के राजा हैं. (१८) प्र पर्वतस्य वृषभस्य पृष्ठान्नावश्चरन्ति स्वसिच ऽ इयानाः. ता ऽ आववृत्रन्नधरागुदक्ता ऽ अहिं बुध्य्मनु रीयमाणाः. विष्णोर्विक्रमणमसि विष्णोर्विक्रान्तमसि विष्णोः क्रान्तमसि.. (१९) १२० - यजुर्वेद

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