भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

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पूर्वार्ध दसवां अध्याय पुत्रमिव पितरावश्विनोभेन्द्रावथुः काव्यैर्दꣲ सनाभिः. यत्सुरामं व्यपिबः शचीभिः सरस्वती त्वा मघवन्नभिष्णक्.. (३४) हे इंद्र देव! जिस प्रकार पिता पुत्र की रक्षा करता है, उसी प्रकार अश्विनीकुमारों ने राक्षसों के संपर्क के कारण गलत मंत्रों से अशुद्ध हुए सोमरस को पी कर भी आप की रक्षा की. जब पवित्र मददायी सोमरस का आप ने पान किया तब वाणी की देवी सरस्वती आप के अनुकूल हुईं ( अर्थात् अशुद्धता जन्य दोष से नाराज हुईं तत्पश्चात उन की वह नाराजगी दूर हुई ). ( ३४ ) १२४ - यजुर्वेद