भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 126, कुल 421 में से

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पृष्ठ 126

पूर्वार्ध ग्यारहवां अध्याय यस्य प्रयाणमन्वन्य ऽ इद्ययुर्देवा देवस्य महिमानमोजसा. यः पार्थिवानि विममे स ऽ एतशो रजा ᳪ सि देवः सविता महित्वना.. (६) जिस सविता देव के प्रयाण ( गमन ) महिमा और ओज का अन्य देवता गण अनुकरण करते हैं, वह सविता देव अपनी महिमा से सर्वत्र व्यापक हैं. ( ६ ) देव सवितः प्र सुव यज्ञं प्र सुव यज्ञपतिं भगाय. दिव्यो गन्धर्वः केतपूः केतं नः पुनातु वाचस्पतिर्वाचं नः स्वदतु.. (७) हे सविता देव! आप सभी को यज्ञ के लिए प्रेरित करने की कृपा करें. यज्ञपति को सौभाग्यशाली बनाने की कृपा कीजिए. आप दिव्य और पवित्रकारी हैं. वाणी के स्वामी हैं. हमारी वाणी को मधुरता से संचारित करने की कृपा करें. ( ७ ) इमं नो देव सवितर्यज्ञं प्रणय देवाय्व ᳪ सखिविद ᳪ सत्राजितं धनजित ᳪ स्वर्जितम्. ऋचा स्तोम ᳪ समर्धय गायत्रेण रथन्तरं बृहद्गायत्रवर्तनि स्वाहा.. (८) हे सविता देव! आप यज्ञ को और अधिक ऊर्जामय बनाते हैं. आप मित्रता को जानने वाले और धन जीतने वाले हैं. आप हमारे यज्ञ को बढ़ाइए. हम वैदिक मंत्रों से आप की स्तुति करते हैं. गायत्र साम से रथंतर और बृहत्साम को परिपुष्ट करने की कृपा कीजिए. सविता देव के लिए स्वाहा. ( ८ ) देवस्य त्वा सवितुः प्रसवेश्विनोर्बाहुभ्यां पूष्णो हस्ताभ्याम्. आददे गायत्रेण छन्दसाङ्गिरस्वत्पृथिव्याः सधस्थादग्निं पुरीष्यमङ्गिरस्वदाभर त्रैष्टुभेन छन्दसाङ्गिरस्वत्.. (९) सविता देव सिरजनहार हैं. हम अश्विनीकुमार की बाहु और पूषा देव के हाथों से गायत्री छंद के प्रभाव से सविता देव को ग्रहण करते हैं. हम सविता देव को अंगिरा ऋषि की भांति ग्रहण करते हैं. त्रिष्टुप् छंद की प्रेरणा से आप अंगिरा ऋषि की भांति पृथ्वी को ऊर्जामय बनाने की कृपा करें. ( ९ ) अभ्रिरसि नार्यसि तया वयमग्नि ᳪ शकेम खनितु ᳪ सधस्थ ऽ आ. जागतेन छन्दसाङ्गिरस्वत्.. (१०) आप अभ्रि ( मिट्टी खोदने का साधन ) हैं. आप नारी हैं. हम आप की कृपा से जगती छंद के प्रभाव से अंगिरा ऋषि की भांति पृथ्वी पर अग्नि को धारण करने की सामर्थ्य पा सकें. ( १० ) हस्त ऽ आधाय सविता बिभ्रदभ्रि ᳪ हिरण्ययीम्. अग्नेर्ज्योतिर्निचाय्य पृथिव्या ऽ अध्याभरदानुष्टुभेन छन्दसाङ्गिरस्वत्.. (११) सविता देव हाथ में स्वर्णमयी अभ्रि ( मिट्टी खोदने का साधन ) धारण करते १२६ - यजुर्वेद