यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसोम और सोम पात्र का वर्णन २-४ १०७-१०८ हविष्यान्न से पूर्ण रथ की स्थापना ५ १०८ यज्ञ वृद्धि की कामना ६ १०८ बलवान अग्नि का वर्णन ७-९ १०८-१०९ सत्यमार्ग के प्रेरक सविता देव की स्तुति १० १०९ बृहस्पति की विजय कामना ११-१२ १०९-११० युद्ध में विजय की कामना १३-१९ ११०-१११ सुख एवं आयु वृद्धि की कामना २०-२१ १११ पृथ्वी की उपासना २२ १११-११२ सोम का राजत्व २३ ११२ परमात्मा की स्तुति २४-२७ ११२ अग्नि देव की स्तुति २८ ११३ इच्छापूर्ति की कामना २९ ११३ विभिन्न विजयों का वर्णन ३०-३४ ११३-११४ देवों और दिशाओं के लिए आहुतियां ३५-३६ ११४-११५ अग्नि से शत्रुओं को हराने का निवेदन ३७ ११५ सुख एवं समृद्धि के लिए प्रार्थना ३८-४० ११५ दसवां अध्याय राष्ट्रदायी जल की महत्ता १-४ ११६-११७ विभिन्न देवों के लिए आहुति समर्पण ५ ११७-११८ कुशों की पवित्रता ६ ११८ जल की स्थापना ७-८ ११८ यज्ञ स्थल की रक्षा के लिए प्रार्थना ९-१५ ११८-१२० मित्र और वरुण की स्तुति १६ १२० यजमान का अभिषेक १७ १२० शक्ति प्राप्ति के लिए प्रार्थना १८ १२० जलधाराओं का वर्णन १९ १२०-१२१ प्रजापति से प्रार्थना २० १२१ इंद्र देव से ज्ञान प्राप्ति के लिए प्रार्थना २१-२२ १२१ आहुति समर्पण २३ १२१ परमात्मा की स्तुति २४-२५ १२२ सुखदायी आसन २६ १२२ व्रतधारी यजमान २७-२८ १२२ अग्नि की महिमा का वर्णन २९ १२२-१२३