भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

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पृष्ठ 130

पूर्वार्ध ग्यारहवां अध्याय अपां पृष्ठमसि योनिरग्नेः समुद्रमभितः पिन्वमानम्. वर्धमानो महाँ २ आ च पुष्करे दिवो मात्रया वरिम्णा प्रथस्व.. (२९) आप जल के आधार और अग्नि की योनि हैं. आप समुद्र की बढ़ोतरी करते हैं. आप महान् व कमल की भांति स्वर्गिक हैं. आप पृथ्वी के परिणाम जितने विस्तृत होने की कृपा कीजिए. ( २९ ) शर्म च स्थो वर्म च स्थो ऽ च्छिद्रे बहुले उभे. व्यचस्वती सं वसाथां भृतमग्निं पुरीष्यम्.. (३०) आप सुखदायी व स्थायी हैं. आप कवच के समान सुरक्षा करने वाले हैं. आप दोनों हितेच्छु हैं. आप चमकीले, भरणपोषण करने वाले व अग्नि की बढ़ोतरी करने वाले हैं. ( ३० ) सं वसाथा ँ४ स्वर्विदा समीची उरसा त्मना. अग्निमन्तर्भरिष्यन्ती ज्योतिष्मन्तमजस्रमित्.. (३१) आप अग्नि को अपने में बसाइए. अग्नि स्वयं प्रकाशवान हैं. आप उस ( हृदय ) में प्रज्वलित होते हैं. आप ज्योतिमान व अजस्र प्रकाशित होते हैं. ( ३१ ) पुरीष्योसि विश्वभरा ऽ अथर्वा त्वा प्रथमो निरमन्थदग्ने. त्वामग्ने पुष्करादध्यथर्वा निरमन्थत. मूर्ध्नो विश्वस्य वाघतः.. (३२) हे अग्नि! आप सर्वव्यापक व विश्व का भरणपोषण करने वाले हैं. सर्वप्रथम अथर्वा ऋषि ने अरणि मंथन से आप को प्रकट किया. उन्होंने आप को सम्मानपूर्वक विश्व के उच्च भाग पर स्थापित किया. ( ३२ ) तमु त्वा दध्यङ्ङृषिः पुत्र ऽ ईंधे अथर्वणः. वृत्रहणं पुरन्दरम्.. (३३) हे अग्नि! दध्यङ् ऋषि अथर्वा ऋषि के पुत्र हैं. अथर्वण ने वृत्रहंता व नगर भेदक को प्रकट किया. ( ३३ ) तमु त्वा पाथ्यो वृषा समीधे दस्युहन्तमम्. धनञ्जयं ँ४ रणेरणे.. (३४) हे अग्नि! आप सत्यथगामी, बलवान व डाकुओं के नाशक हैं. आप समिधाओं से प्रज्वलित होते हैं और आप हर युद्ध में धन जीतने वाले हैं. ( ३४ ) सीद होतः स्व ऽ उ लोके चिकित्वान्सादया यज्ञ ँ४ सुकृतस्य योनौ. देवावीर्देवान्हविषा यजास्यग्ने बृहद्यजमाने वयो धाः.. (३५) हे अग्नि! आप होता रूप में प्रतिष्ठित हैं. आप अपने लोक को प्रकाशित करते हैं. आप यज्ञ संपन्न करते हैं. आप श्रेष्ठ ( अच्छे ) कार्य करने वाले हैं. आप श्रेष्ठ कर्म १३० - यजुर्वेद