यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 137, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंपूर्वार्ध ग्यारहवां अध्याय
धारण करते हैं. अग्नि के लिए स्वाहा. प्रजापति मनु देव के लिए स्वाहा. प्रजापति अग्नि के लिए स्वाहा. प्रजापति वैश्वानर के लिए स्वाहा. ( ६६ )
विश्वो देवस्य नेतुर्मर्तो वुरी॑त स॒ख्यम्. विश्वो राय ऽ इषुध्यति द्यु॒म्नं वृणीत पुष्यसे स्वाहा.. (६७)
सभी जन देवताओं के नेता परमेश्वर का सखि भाव ( उन की कृपा से ) पा जाएं. ( उन की कृपा से ) संसार के सब वैभव पा जाएं. ( उन की कृपा से ) संसार की सारी शान शौकत पा जाएं. ( उन की कृपा से ) संसार के तेजों को पा जाएं. परमेश्वर के लिए स्वाहा. ( ६७ )
मा सु भित्था मा सु रिषो ऽ म्ब धृष्णु वीरयस्व सु. अग्निश्चेदं करिष्यथः.. (६८)
हे उखा देव! आप का कभी भी भेदन न हो. आप कभी भी नष्ट न हों. आप धैर्यशाली वीर, कर्तव्यपरायण हैं. हे उखा देव! आप और अग्नि इस यज्ञ कार्य को संपादित कराने की कृपा करें. ( ६८ )
दृ ६४ हस्व देवि पृथिवि स्वस्तय ऽ आसुरी माया स्वधया कृतासि. जुष्टं देवेभ्य ऽ इदमस्तु हव्यमरिष्टा त्वमुदिहि यज्ञे अस्मिन्.. (६९)
हे पृथिवी देवी! आप असुरों की तरह मायावी रूप बदलने में समर्थ हैं. आप ने कल्याण हेतु उखा का रूप धारण किया है. आप सुदृढ़ होइए व इष्ट हवि का भोग लगाइए. आप आनंद देने व यज्ञ के समाप्त होने तक यज्ञ में उपस्थित रहने की कृपा कीजिए. ( ६९ )
द्र्वन्नः सर्पिरासुतिः प्रत्नो होता वरेण्यः. सहसस्पुत्रो अद्भुतः.. (७०)
हे अग्नि! आप धनवान, घी पीने वाले, होता, श्रेष्ठ, अद्भुत व साहस के पुत्र हैं. आप इस यज्ञ को सफल बनाने की कृपा कीजिए. ( ७० )
परस्या ऽ अधि संवतो ऽ वराँ २ अभ्यातर. यत्राहमस्मि ताँ २ अव.. (७१)
हे अग्नि! शत्रुओं के साथ संघर्षशील हमारे समीप के सैनिकों की रक्षा करने की कृपा कीजिए. जहां हम हैं, आप उस स्थान की भी रक्षा करने की कृपा कीजिए. ( ७१ )
परमस्याः परावतो रोहिदश्व ऽ इहा गहि. पुरीष्यः पुरुप्रियोग्ने त्वं तरा मृधः.. (७२)
हे अग्नि! आप रोहित नामक घोड़े की कांति से घिरे हुए हैं. आप यहां पधारने की कृपा कीजिए. आप धनवान व परम प्रिय हैं. आप शत्रुओं का नाश और हमारे यज्ञ को सफल बनाने की कृपा कीजिए. ( ७२ )
यजुर्वेद – १३७