यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअग्नि का वर्चस्व ४७-५४ १४८-१४९ स्वर्गिक जल से शोभायमान सोम ५५ १४९ वाणी विस्तार ५६ १४९ इंद्र की स्तुति ५७ १४९ अग्नि की स्तुति ५८-६० १४९-१५० उखा की मुक्ति कामना ६१ १५० निर्ऋत देवी की उपासना ६२-६५ १५०-१५१ इंद्र की स्तुति ६६-६७ १५१ हल जोतने के लिए किसानों का आह्वान ६८-७२ १५१-१५२ ईश्वर से कृपा की कामना ७३ १५२ विभिन्न देवों के लिए आहुतियां ७४ १५२ ओषधि वर्णन ७५-१०१ १५२-१५६ प्रथम जन्मा के लिए आहुति १०२ १५६ पृथ्वी की स्तुति १०३ १५६ बहुगुणी अग्नि १०४-१११ १५६-१५८ सोम की स्तुति ११२-११३ १५८ अग्नि की स्तुति ११४-११७ १५८-१५९ तेरहवां अध्याय अग्नि की महिमा १ १६० सृष्टि की उत्पत्ति एवं विकास २-५ १६०-१६१ सर्पों को नमन ६-८ १६१ अग्नि की स्तुति ९-१६ १६१-१६२ देवी की उपासना १७-१९ १६२-१६३ दूर्वा की स्तुति २०-२१ १६३ इंद्र, अग्नि और बृहस्पति की स्तुति २२-२३ १६३ प्रजापति की स्तुति २४ १६३-१६४ पारस्परिक सहयोग की कामना २५ १६४ प्रकृति में माधुर्य की कामना २६-२९ १६४ कूर्म की वंदना ३०-३२ १६४-१६५ विष्णु एवं इंद्र की एकता ३३ १६५ उखा का वर्णन ३४-३५ १६५ अग्नि की उपासना ३६-५४ १६५-१६९ विभिन्न उत्पत्तियां ५५-५८ १६९-१७०