यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 150, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंपूर्वार्ध बारहवां अध्याय हे अग्नि! आप नगरों के स्वामी हैं. आप धनवान हैं. आप पुष्टिमान हैं. आप सभी दिशाओं को कल्याणकारी बनाइए. आप यहां अपने मूल स्थान में प्रतिष्ठित होने की कृपा कीजिए. (५९) भवतन्नः समनसौ सचेतसावरेपसौ. मा यज्ञ १४ हि १४ सिष्टं मा यज्ञपतिं जातवेदसौ शिवौ भवतमद्य नः.. (६०) हे अग्नि! आप सर्वज्ञ हैं. आप हमें समान मन वाला बनाइए. आप हमें समान चित्त वाला बनाइए. आप हमें समान श्रद्धा वाला बनाइए. आप यज्ञ में हिंसा मत कीजिए. आप यज्ञपति हैं. आप आज हमारे प्रति कल्याणकारी होने की कृपा कीजिए. (६०) मातेव पुत्रं पृथिवी पुरीष्यमग्नि १४ स्वे योनावभारुखा. तां विश्वैर्देवैर्ऋतुभिः संविदानः प्रजापतिर्विश्वकर्मा वि मुञ्चतु.. (६१) जैसे माता पुत्र को धारती है, वैसे ही उखा कल्याणकारी अग्नि को धारती है. समस्त देवगणों और ऋतु द्वारा ऐक्य भाव से प्रेरित उखा को प्रजापति विश्वकर्मा पाश से मुक्त करने की कृपा करें. (६१) असुन्वन्तमयजमानमिच्छ स्तेनस्येत्यामन्विहि तस्करस्य. अन्यमस्मदिच्छ सा त ऽ इत्या नमो देवि निर्ऋते तुभ्यमस्तु.. (६२) हे दुष्ट दलन में समर्थ! आप चोरों और तस्करों का नाश करने में समर्थ हैं. आप विशिष्ट शक्तिवान हैं. आप चोरडाकू छोड़ कर अन्य लोग हमें दीजिए. हे देवी! आप के लिए हमारा नमस्कार. (६२) नमः सु ते निर्ऋते तिग्मतेजो ऽ यस्मयं विचृता बन्धमेतम्. यमेन त्वं यम्या संविदानोत्तमे नाके अधि रोहयैनम्.. (६३) हे निर्ऋते! आप तेजस्वी हैं. आप शक्तिमान हैं. आप लोहे जैसी दृढ़ हैं. आप हमें सांसारिक सत्व बंधन से मुक्त कीजिए. यजमान को यमलोक से उत्तम स्वर्गलोक में पहचानने की कृपा कीजिए. (६३) यस्यास्ते घोर ऽ आसञ्जुहोम्येषां बन्धानामवसर्जनाय. यां त्वा जनो भूमिरिति प्रमन्दते निर्ऋतिं त्वाहं परिवेद विश्वतः.. (६४) हे निर्ऋते! आप क्रूर स्वभाव वाली हैं. हम जन्ममरण के बंधन से मुक्त होने के लिए आप को आहुति भेंट करते हैं. भले ही लोग आप को भूमि कहते हैं, पर वे आप को सब ओर से सर्वज्ञ मानते हैं. (६४) यं ते देवी निर्ऋतिराबबन्ध पाशं ग्रीवास्वविचृत्यम्. तं ते विष्याम्यायुषो न मध्यादथैतं पितुमद्धि प्रसूतः. नमो भूत्यै येदं चकार.. (६५) १५० - यजुर्वेद