भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 155, कुल 421 में से

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पृष्ठ 155

पूर्वार्ध बारहवां अध्याय स्वर्गलोक से ओषधियां पृथ्वीलोक को प्राप्त होती हैं. जो जीव इन का ठीक से सेवन करता है, वह कभी समय से पहले मरता नहीं है. ( ९१ ) या ऽ ओषधीः सोमराज्ञीर्बहीः शतविचक्षणाः. तासामसि त्वमुत्तमार्ं कामाय श १७ हृदे.. (९२) ओषधि सोम की रानी व बहुगुणा है. वह सैकड़ों विलक्षण गुणों वाली है. वे ओषधियां अभीष्ट सुख देने वाली व हृदय को शक्ति देने में समर्थ हैं. ( ९२ ) या ऽ ओषधीः सोमराज्ञीर्विष्ठिताः पृथिवीमनु. बृहस्पतिप्रसूता ऽ अस्यै संदत्त वीर्यम्.. (९३) जो ओषधि सोम की रानी है, वह बहुगुणा है. सैकड़ों विलक्षण गुणों वाली है. ओषधियां अभीष्ट सुख देने वाली हैं. हृदय को शक्ति देने में समर्थ हैं. ओषधियां पुरुष को वीर्यवान बनाने की कृपा करें. ( ९३ ) याश्चेदमुपशृण्वन्ति याश्च दूरं परागताः. सर्वाः संगत्य वीरुधोस्यै संदत्त वीर्यम्.. (९४) जो ओषधियां पास हैं, जो दूर हैं, जो विभिन्न रूपों में उगी हुई हैं, वे सभी हमारी प्रार्थनाएं सुनती हैं. सभी ओषधियां साथ मिल कर हमें वीर्य ( शक्ति ) प्रदान करने की कृपा करें. ( ९४ ) मा वो रिषत् खनिता यस्मै चाहं खनामि वः. द्विपाच्चतुष्पादस्माक १७ सर्वमस्त्वनातुरम्.. (९५) हे ओषधियो! जब हम रोग के उपचार के लिए आप को खोदते हैं तो आप की कृपा से खनन दोष से मुक्त हों. दोपाए, चौपाए और हमारे सभी लोग आप की कृपा से रोग मुक्त हो जाएं. ( ९५ ) ओषधयः समवदन्त सोमेन सह राज्ञा. यस्मै कृणोति ब्राह्मणस्त १७ राजन् पारयामसि.. (९६) ओषधियां अपने स्वामी सोम राजा के समान ही कहती हैं—राजन्! हम जिसे ब्राह्मण बना देती हैं, वह पार हो जाता है. ( ९६ ) नाशयित्री बलासस्यार्शस ऽ उपचितामसि. अथो शतस्य यक्ष्माणां पाकारोरसि नाशनी.. (९७) ओषधियां बलनाशक व रोगों का भी नाश करने वाली हैं. ओषधियां मस्से जैसे रोगों का भी उपचार करने वाली हैं. ओषधियां यक्ष्मा जैसे सैकड़ों रोगों व पके हुए फोड़े का भी नाश करने वाली हैं. ( ९७ ) यजुर्वेद - १५५