भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

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ब्राह्मणों की स्तुति २२ २८८ विभिन्न देवों एवं कर्मों के लिए स्वाहा २३-३४ २८८-२९१ तेईसवां अध्याय परमात्मा की उत्पत्ति १ २९२ परमात्मा और प्रजापति के लिए हवि का विधान २-४ २९२-२९३ यज्ञ के साधनों का संयोजन ५ २९३ यज्ञ रूपी अश्व ६-८ २९३ ब्रह्मा होता संवाद ९-१२ २९३-२९४ अग्नि को नमन १३ २९४ यज्ञ रूपी रथ की प्रशंसा १४ २९४ यज्ञ ऊर्जा की महिमा १५ २९४-२९५ परम शक्ति की अनश्वरता १६ २९५ विजय के लिए ऊर्जा १७ २९५ अंबा की स्तुति १८ २९५ गणपति का आह्वान १९ २९५-२९६ यज्ञ शक्ति और देव शक्ति २० २९६ दुष्टों का दमन करने वाली परम शक्ति २१ २९६ शक्तिशाली जल २२ २९६ यज्ञ के बारे में निरर्थक बातें न करें २३ २९६ पूर्वजों की प्रसन्नता २४ २९६ कम बोलने की सलाह २५ २९६ राष्ट्र के लिए प्रजापति से प्रार्थना २६-२७ २९७ पाप भेदक यज्ञाग्नि २८ २९७ परमानंददायी गतिविधियां २९ २९७ अपनी हानि से दुःख ३०-३१ २९७-२९८ यज्ञ देव की कृपा ३२ २९८ यज्ञाग्नि की शांति ३३-३७ २९८-२९९ सोम का आह्वान ३८ २९९ सुखदाता परमात्मा की वंदना ३९-४४ २९९-३०० ब्रह्मा होता संवाद ४५-४८ ३०० विष्णु के तीन पैर ४९-५० ३००-३०१ पंचमहाभूतों में परम पुरुष का रमण ५१-५२ ३०१ ब्रह्मा होता संवाद ५३-६५ ३०१-३०३