यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 239, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंउन्नीसवां अध्याय स्वादीं त्वा स्वादुना तीव्रां तीव्रेणामृताममृतेन. मधुमर्तीं मधुमता सृजामि स १७ सोमेन. सोमोस्यश्विभ्यां पच्यस्व सरस्वत्यै पच्यस्वेन्द्राय सुत्राम्णे पच्यस्व.. (१) हे ओषध देव! आप स्वादिष्ट, स्वादु, तीव्र व अमृतमय हैं. आप को मधु मिश्रित मधुर सोम के साथ मिला कर सृजित करते हैं. आप दोनों अश्विनीकुमारों के लिए पकने की कृपा करें. आप सरस्वती देवी के लिए पकने की कृपा करें. आप संरक्षक इंद्र देव के लिए पकने की कृपा करें. ( १ ) परीतो षिञ्चता सुत १७ सोमो य उत्तम १७ हवि:. दधन्वा यो नर्यो अप्स्वन्तरा सुषाव सोममद्रिभि:.. (२) हे यजमानो! आप सोम को चारों ओर से उत्तम हवि से सींचिए. आप यजमानों के लिए नीति धारण कीजिए. सोम जल के बीच में हैं. पत्थरों से उस को कूट कर सींचा जाता है. ( २ ) वायो: पूतः पवित्रेण प्रत्यङ्क्सोमो अतिद्रुतः. इन्द्रस्य युज्यः सखा. वायो: पूतः पवित्रेण प्राङ्क्सोमो अतिद्रुतः. इन्द्रस्य युज्यः सखा.. (३) वायु देव शुद्ध, पवित्र व अति तीव्र गति वाले हैं और इंद्र देव के साथ जुड़ते हैं. इंद्र देव के सखा हैं. वायु शुद्ध, पवित्र व बहुत द्रुत गति वाले हैं. इंद्र देव के सखा हैं. ( ३ ) पुनाति ते परिस्रुत १७ सोम १७ सूर्यस्य दुहिता. वारेण शश्वता तना.. (४) सोम पवित्र हैं. चारों ओर से स्रवित ( झरते ) होते हैं. सोम को पवित्र करते हैं. सूर्य की दुहिता पवित्र करती हैं. श्रद्धा तुम्हें पवित्र बनाती हैं. ( ४ ) ब्रह्म क्षत्रं पवते तेज ऽ इन्द्रिय—सुरया सोमः सुत ऽ आसुतो मदाय. शुक्रेण देव देवताः पिपृग्धि रसेनान्नं यजमानाय धेहि.. (५) यजुर्वेद - २३९