यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 264, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंपूर्वार्ध बीसवां अध्याय हे इंद्र देव! आप बलवान व वज्र जैसी भुजाओं वाले हैं. वसिष्ठ ऋषि के वंशज मंत्रों से आप की अभ्यर्थना कर रहे हैं. वे इंद्र देव हमारे वीरों व गोधन को अपने संरक्षण में लें. वे सदा हमारा कल्याण करें. (५४) समिद्धो अग्निरश्विना तप्तो घर्मो विराट् सुतः. दुहे धेनुः सरस्वती सोम १७४ शुक्क्रमहेन्द्रियम्.. (५५) अग्नि को समिधा से प्रज्वलित किया गया है. अश्विनी देव को दीप्यमान बनाया गया है. सरस्वती देवी गाय दुहने की तरह उन के लिए चमकीले महान् सोम का दोहन करती हैं. (५५) तनूपा भिषजा सुतेश्विनोभा सरस्वती. मध्वा रजा १७४ सीन्द्रियमिन्द्राय पर्थिभिर्वहान्.. (५६) दोनों वैद्य अश्विनीकुमार हमारे तन के रक्षक हैं. देवी सरस्वती मधुर सोमरस को अनेक मार्गों से वहन करती हुई इंद्र देव के लिए ले जाती हैं. (५६) इन्द्रायेन्दु १७४ सरस्वती नराश १७४ सेन नग्नहुम्. अधातामश्विना मधु भेषजं भिषजा सुते.. (५७) यजमान ने सोमरस तैयार किया. देवी सरस्वती ने उस को महान् ओषधि से युक्त बनाया. वैद्य अश्विनीकुमारों ने ओषध स्वरूप उस को धारण किया. (५७) आजुह्वाना सरस्वतीन्द्रायेन्द्रियाणि वीर्यम्. इडाभिरश्विनाविष १७४ समूर्ज १७४ स १७४ रयिं दधुः... (५८) सरस्वती देवी इंद्र देव का आह्वान करने वाली हैं. सरस्वती देवी ने उन के लिए इंद्रियों में पराक्रम स्थापित किया. इड़ा देवी और अश्विनीकुमारों ने उन के लिए ऊर्जा और धन धारण किया. (५८) अश्विना नमुचेः सुत १७४ सोम १७४ शुक्क्रं परिस्रुता. सरस्वती तमा भरद्बर्हिषेन्द्राय पातवे.. (५९) अश्विनी देवों ने निचोड़े गए चमकीले सोम को ओषधियों के साथ मिलाया. सरस्वती ने नमुची राक्षस से सोम का हरण किया. इंद्र देव के पीने के लिए कुश के आसन पर स्थापित किया. (५९) कवष्यो न व्यचस्वतीरश्विभ्यां न दुरो दिशः. इन्द्रो न रोदसी उभे दुहे कामान्त्सरस्वती.. (६०) अश्विनी, सरस्वती और इंद्र देव ने विराट् यज्ञ से स्वर्गलोक तथा पृथ्वीलोक दोनों का दोहन किया. सारी दिशाओं से अपनी कामनाओं का दोहन किया. (६०) २६४ - यजुर्वेद