यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 267, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंपूर्वार्ध बीसवां अध्याय सुनहरे पथ पर घूमने वाले विशिष्ट श्रेष्ठ मनुष्य जैसे अश्विनीकुमार देवी सरस्वती और इंद्र देव हम मनुष्यों के यज्ञ में पधारें. हवि ग्रहण करें. सब प्रकार से हमारी रक्षा करें. ( ७४ ) ता भिषजा सुकर्मणा सा सुदुघा सरस्वती. स वृत्रहा शतक्रतुरिन्द्राय दधुरिन्द्रियम्.. (७५) अश्विनीकुमार वैद्य व सुकर्मा हैं. सरस्वती देवी अच्छा दोहन करने वाली हैं. वृत्रासुर नाशक सैकड़ों यज्ञ करने वाले इंद्र देव यजमानों के लिए उन की इंद्रियों में सामर्थ्य प्रदान करें. ( ७५ ) युव १oꣳ सुराममश्विना नमुचावासुरे सचा. विपिपानाः सरस्वतीन्द्रं कर्मस्वावत.. (७६) हे अश्विनीकुमारो ! देवी सरस्वती ! आप युवा हैं. आप नमुचि राक्षस से ओषधि रस ले कर विभिन्न प्रकार से इंद्र देव को पान कराइए. सब प्रकार से उन की रक्षा कीजिए. ( ७६ ) पुत्रमिव पितरावश्विनोभेन्द्रावथुः काव्यैर्द १oꣳ सनाभिः. यत्सुरामं व्यपिबः शचीभिः सरस्वती त्वा मघवन्नभिष्णक्.. (७७) हे अश्विनीकुमारो ! आप यजमान की मातापिता द्वारा पुत्र की रक्षा करने के समान रक्षा करते हैं. इंद्र देव विद्वान् हैं. वे यजमान की प्रार्थनाओं को सुनते हैं. संग्राम में विपत्तिग्रस्त होने पर अश्विनी देव रक्षा करते हैं. इंद्र देव अपनी सामर्थ्य से ओषधियों का पान करते हैं, तो सरस्वती देवी आप की स्तुति करती हैं. ( ७७ ) यस्मिन्नश्वास ऽ ऋषभास ऽ उक्षणो वशा मेषा ऽ अवसृष्टास ऽ आहुताः. कीलालपे सोमपृष्ठाय वेधसे हृदा मतिं जनय चारुमग्नये.. (७८) हे यजमानो ! अग्नि अन्न ग्रहण करने वाले हैं. सोम को ग्रहण करने वाले हैं. श्रेष्ठ बुद्धि वाले हैं. आप उन के लिए अपना मन शुद्ध कीजिए. आप उन के लिए अपनी बुद्धि शुद्ध कीजिए. इस से घोड़े सिंचाई योग्य बैल और सुंदर वस्तुओं की प्राप्ति होती है. ( ७८ ) अहाव्यग्ने हविरास्ये ते स्रुचीव घृतं चम्वीव सोमः. वाजसनि १oꣳ रयिमस्मे सुवीरं प्रशस्तं धेहि यशसं बृहन्तम्.. (७९) हे अग्नि ! हम आप का आह्वान करते हैं. हम आप के मुख में हवि भेंट करते हैं. आप के लिए सुवा में घी और पात्र में सोम रहता है. आप हमें अन्न, धन, श्रेष्ठवीर, प्रशंसनीय धन, यश व प्रचुर धन प्रदान कीजिए. ( ७९ ) यजुर्वेद - २६७