भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

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पृष्ठ 269

पूर्वार्ध बीसवां अध्याय हे इंद्र देव! आप मनोयोग से हमारे यज्ञ में पधारिए. हम आप के लिए सोमरस संस्कारित करने वाले हैं. आप आ कर इन हवियों को ग्रहण करने की कृपा कीजिए. ( ८८ ) इन्द्रा याहि तूतुजान उप ब्रह्माणि हरिवः. सुते दधिष्व नश्चनः... (८९) हे इंद्र देव! आप अपने हरि नाम के घोड़ों से आवाजाही करते हैं. आप अपने पुत्रों के लिए इस हवि को ग्रहण कीजिए. ( ८९ ) अश्विना पिबतां मधु सरस्वत्या सजोषसा. इन्द्रः सुत्रामा वृत्रहा जुषन्ता ३४ सोम्यं मधु.. (९०) अश्विनीकुमार देवी सरस्वती के साथ समान मन वाले हों. वे देवी सरस्वती के साथ मधुर सोमरस का पान करें. इंद्र देव सुरक्षक व वृत्र हंता हैं. वे भी सोमरस का पान करें. ( ९० ) यजुर्वेद - २६१