यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 272, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंउत्तरार्ध इक्कीसवां अध्याय धन प्राप्त कीजिए. आप इस यज्ञ में मधुर रस पीजिए. मदमस्त व तृप्त होइए. देवपथों से गमन करने की कृपा कीजिए. (११) समिद्धो अग्निः समिधा सुसमिद्धो वरेण्यः. गायत्री छन्द ऽ इन्द्रियं त्र्यविर्गौर्वयो दधुः... (१२) हे अग्नि! आप समिधावान हैं. समिधा से आप को अच्छी तरह प्रदीप्त किया गया है. आप वरेण्य हैं. तीनों लोक और तीनों अवस्थाएं, अग्नि और गायत्री छंद आप के शरीर को बल और आयु प्रदान करें. (१२) तनूनपाच्छुचिव्रतस्तनूपाश्च सरस्वती. उष्णिहा छन्द ऽ इन्द्रियं दित्यवाड्गौर्वयो दधुः... (१३) अग्नि तन की रक्षा करने वाले और पवित्र संकल्प वाले हैं. सरस्वती देवी उष्णिक् छंद और दिव्य हवि को धारण करने वाले अंग हमारे लिए बल और आयु धारण करने की कृपा करें. (१३) इडाभिरग्निरीड्यः सोमो देवो अमर्त्यः. अनुष्टुप्छन्द ऽ इन्द्रियं पञ्चाविर्गौर्वयो दधुः.. (१४) अग्नि प्रार्थनाओं से प्रसन्न होने योग्य हैं. सोम अमर हैं. अनुष्टुप् छंद और पांचों इंद्रिय रूपी गायों से हमारे लिए बल तथा आयु धारण करने की कृपा करें. (१४) सुबर्हिरग्निः पूषण्वान्स्तीर्णबर्हिरमर्त्यः. बृहती छन्द ऽ इन्द्रियं त्रिवत्सो गौर्वयो दधुः... (१५) अग्नि कुश के अच्छे आसन वाले, पुष्टिदायी, विस्तृत आकाश को शुद्ध करने वाले व अमर हैं. बृहती छंद तीन बछड़ों वाली गायों से तथा इंद्रियों से हमारे लिए बल और आयु धारण करने की कृपा करें. (१५) दुरो देवीर्दिशो महीर्ब्रह्मा देवो बृहस्पतिः. पङ्क्तिश्छन्द ऽ इहेन्द्रियं तुर्यवाड्गौर्वयो दधुः... (१६) बृहस्पति देव, दूर की देवियां, महिमाशाली ब्रह्मा देव हमारे लिए बल और आयु धारण करने की कृपा करें. पंक्ति, छंद, इंद्रियां, प्राणिमात्र का पोषण करने वाली गायों से हमारे लिए बल तथा आयु धारण करने की कृपा करें. (१६) उषे यह्वी सुपेशसा विश्वे देवा ऽ अमर्त्याः. त्रिष्टुप्छन्द ऽ इहेन्द्रियं पष्ठवाड्गौर्वयो दधुः... (१७) महान् तथा श्रेष्ठ स्वरूप वाली उषा देवी, सभी देवता एवं अमर देवगण हमारे लिए बल एवं आयु धारण करने की कृपा करें. त्रिष्टुप् छंद इंद्रियां पोषण २७२ – यजुर्वेद 632/17