यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 286, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंउत्तरार्ध बाईसवां अध्याय लिए स्वाहा. देख चुके के लिए स्वाहा. देखनेपरखने के लिए स्वाहा. पलक झपकाने के लिए स्वाहा. जो खाता है, उस के लिए स्वाहा. जो पीता है, उस के लिए स्वाहा. जो मूत्र विसर्जित करता है, उस के लिए स्वाहा. करने वाले के लिए स्वाहा. कर चुके के लिए स्वाहा. ( ८ ) तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि. धियो यो नः प्रचोदयात्.. ( ९ ) सविता देव को नमस्कार है. सविता देव वरेण्य, सौभाग्यदायी व देवों को धारण करते हैं. वे बुद्धि को श्रेष्ठ मार्ग पर उन्मुख करते हैं. वे हमारी बुद्धि को प्रेरित करने की कृपा करें. ( ९ ) हिरण्यपाणिमूतये सवितारमुप ह्वये. स चेत्ता देवता पदम्.. ( १० ) सविता देव! आप सोने के हाथों वाले व आप सर्वज्ञ व चित्त में धारण करने योग्य हैं. हम अपनी रक्षा के लिए आप का आह्वान करते हैं. ( १० ) देवस्य चेततो महीं प्र सवितुर्हवामहे. सुमति १७ सत्यराधसम्.. ( ११ ) हे सविता देव! आप चैतन्य करते हैं. आप सत्य रूपी धन वाले हैं. हम सुमति ( अच्छी बुद्धि ) हेतु आप का आह्वान करते हैं. ( ११ ) सुष्टुति १७ सुमतीवृधो राति १७ सवितुरीमहे. प्र देवाय मतीविदे.. ( १२ ) हे सविता देव! आप सुमति की बढ़ोतरी करते हैं. आप हम को सुष्ठु ( श्रेष्ठ ) गति प्रदान करने की कृपा कीजिए. हम बुद्धिपूर्वक सविता देव की उपासना करते हैं. ( १२ ) राति १७ सत्यपतिं महे सवितारमुप ह्वये. आसवं देववीतये.. ( १३ ) हम सत्यति, धनशील, वैभववान सविता देव की उपासना करते हैं. हम देवताओं को तृप्त करने के लिए सविता देव की उपासना करते हैं. ( १३ ) देवस्य सवितुर्मतिमासवं विश्वदेव्यम्. धिया भगं मनामहे.. ( १४ ) सविता देव वैभववान हैं. सभी देवताओं के हितैषी हैं. सौभाग्य बढ़ाने वाली बुद्धि को पाने के लिए हम उन की उपासना करते हैं. ( १४ ) अग्नि १७ स्तोमेन बोधय समिधानो अमर्त्यम्. हव्या देवेषु नो दधत्.. ( १५ ) हे पुरोहित! आप अग्नि को स्तोत्रों से जाग्रत कीजिए. समिधाओं से प्रज्वलित कीजिए. अग्नि अमर हैं. देवताओं के लिए हमारी हवि को धारण करते हैं. ( १५ ) स हव्यवाडमर्त्य ऽ उशिग्दूतश्चनोहितः. अग्निर्धिया समृण्वति.. ( १६ ) २८६ - यजुर्वेद