यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअड़तीसवां अध्याय यज्ञ ऊर्जा को ग्रहण करना १ ४०८ इड़ा एवं सरस्वती देवी का आह्वान २ ४०८ पोषक यज्ञ ऊर्जा ३ ४०८ अश्विनी व इंद्र आदि देवों के लिए आहुति ४ ४०८ सरस्वती देवी का दिव्य ज्ञान ५ ४०८ इंद्र देव की गायत्री छंद से स्तुति ६ ४०९ वायु के लिए आहुति अर्पण ७ ४०९ इंद्र देव के लिए आहुति ८ ४०९ यम देव के लिए आहुति ९ ४०९ यज्ञ विस्तार के लिए रसमयी आहुतियां १० ४१० सुखशांति के लिए आहुति अर्पण ११ ४१० अश्विनीकुमारों से यज्ञ की रक्षा करने की प्रार्थना १२-१३ ४१० परब्रह्म से प्रजा की रक्षा के लिए आग्रह १४ ४१० विभिन्न देवों के लिए आहुति अर्पण १५ ४१०-४११ दिव्य गुण वाली परम शक्ति १६ ४११ अग्नि की स्तुति १७-१८ ४११ परम शक्ति की स्तुति १९-२० ४११-४१२ यज्ञ देव का आह्वान एवं उन की स्तुति २१-२८ ४१२-४१३ उनतालीसवां अध्याय समृद्धि एवं कल्याण के लिए देवों को आहुतियां १-७ ४१४-४१५ विभिन्न शारीरिक अंगों से देवों की प्रसन्नता ८-९ ४१५-४१६ विभिन्न देवों के लिए आहुतियां १०-१३ ४१६ चालीसवां अध्याय ईश्वर की आराधना १ ४१७ कर्म करते हुए सौ वर्षों तक जीने की इच्छा २ ४१७ अजन्मा ईश्वर एक है ३-४ ४१७ परम शक्ति की व्यापकता ५-८ ४१७-४१८ सृजन और विनाश ९-१२ ४१८