भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 323, कुल 421 में से

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पृष्ठ 323

उत्तरार्ध छब्बीसवां अध्याय अद्भुत हैं. आप को उपयाम पात्र में ग्रहण किया गया है. इसीलिए आप बृहस्पति हैं. उपयाम आप का मूल स्थान है. ( ३ ) इन्द्र गोमन्निहा याहि पिबा सोम ष्ठं शतक्रतो. विद्यद्भिर्ग्रावभिः सुतम्. उपयामगृहीतोसीन्द्राय त्वा गोमत ऽ एष ते योनिरिन्द्राय त्वा गोमते.. (४) हे इंद्र देव! आप गोमान और सैकड़ों यज्ञ करने वाले हैं. आप ( यज्ञ में ) पधारिए. सोमरस पीने की कृपा कीजिए. हम ने पत्थरों से कूट कर, निचोड़ कर सोमरस तैयार किया है. आप गोमान हैं. हम आप को गोमान इंद्र देव के लिए उपयाम में ग्रहण करते हैं. उपयाम आप का मूल स्थान है. ( ४ ) इन्द्रा याहि वृत्रहन्पिबा सोम ष्ठं शतक्रतो. गोमद्भिर्ग्रावभिः सुतम्. उपयामगृहीतोसीन्द्राय त्वा गोमत ऽ एष ते योनिरिन्द्राय त्वा गोमते.. (५) हे इंद्र देव! आप वृत्र नाशक और सैकड़ों यज्ञ करने वाले हैं. आप पधारिए. आप सोमरस पीने की कृपा कीजिए. आप के पुत्रों ने पत्थरों से कूट कर सोमरस आप के लिए तैयार किया है. हम ने आप को गोमान इंद्र देव के लिए उपयाम में ग्रहण किया है. वही आप का मूल स्थान है. ( ५ ) ऋतावानं वैश्वानरममृतस्य ज्योतिष्पतिम्. अजस्रं घर्ममीमहे. उपयामगृहीतोसि वैश्वानराय त्वैष ते योनिर्वैश्वानराय त्वा.. (६) हे वैश्वानर ( अग्नि )! आप ऋतवान ( सत्यवान ) व अमर हैं. आप प्रकाश के स्वामी हैं. हम आप से अजस्र बल चाहते हैं. आप को उपयाम में ग्रहण किया गया है. आप को अग्नि के लिए उपयाम में ग्रहण किया गया है. वही आप का मूल स्थान है. ( ६ ) वैश्वानरस्य सुमतौ स्याम राजा हि कं भुवनानामभिश्रीः. इतो जातो विश्वमिदं वि चष्टे वैश्वानरो यतते सूर्येण. उपयामगृहीतासि वैश्वानराय त्वैष ते योनिर्वैश्वानराय त्वा.. (७) हम वैश्वानर देव की सुमति जैसी सुमति पाएं. वैश्वानर देव संसार के राजा, संसार की शोभा हैं. व देव संसार का निरीक्षण करते हैं और यहीं उत्पन्न हुए हैं. वे सूर्य के समान प्रकाशवान हैं. हम उन को उपयाम में ग्रहण करते हैं. वही उन का मूल स्थान है. ( ७ ) वैश्वानरो न ऽ ऊतय ऽ आ प्र यातु परावतः. अग्निरुक्थेन वाहसा. उपयामगृहीतोसि वैश्वानराय त्वैष ते योनिर्वैश्वानराय त्वा.. (८) यजुर्वेद - ३२३

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