भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 325, कुल 421 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 325

उत्तरार्ध छब्बीसवां अध्याय सभी ऋतुएं यज्ञ का विस्तार करने की कृपा करें. मास हमारी हवि की रक्षा करने की कृपा करें. संवत्सर यज्ञ को धारण करने की कृपा करें. हम सभी प्रजाजनों का परिपालन करने की कृपा कीजिए. ( १४) उपह्वरे गिरीणा ᳵ सङ्गमे च नदीनाम्. धिया विप्रो अजायत.. (१५) पर्वत की कंदराओं, पर्वतों और नदियों के संगम पर ब्राह्मणों में बुद्धि पैदा होती है. ( १५ ) उच्चा ते जातमन्धसो दिवि सद्भूम्या ददे. उग्र ᳵ शर्म महि श्रवः.. (१६) हे सोम! आप उच्चलोक के हैं. आप स्वर्गलोक में रहते हैं. आप हमें श्रेष्ठ भूमि दीजिए. आप उग्र हैं. आप पृथ्‍वी पर स्रवित होइए ( बहिए ). आप सुख प्रदान करने की कृपा कीजिए. ( १६ ) स न ऽ इन्द्राय यज्यवे वरुणाय मरुद्भ्यः. वरिवोवित्परि स्रव.. (१७) हे सोम! आप जलमय हैं. आप यज्ञ में इंद्र देव, वरुण देव व मरुद्गण के लिए स्रवित होइए. ( १७ ) एना विश्वान्यर्य ऽ आ द्युम्नानि मानुषाणाम्. सिषासन्तो वनामहे.. (१८) आप आइए. आप मनुष्यों के लिए स्वर्ग के सारे सुख प्रदान कीजिए. आप की कृपा से हम सुखपूर्वक जीवन निर्वाह कर सकें. ( १८ ) अनु वीरैरनु पुष्यास्म गोभिरन्वश्वैरनु सर्वेण पुष्टैः. अनु द्विपदानु चतुष्पदा वयं देवा नो यज्ञमृता नयन्तु.. (१९) हमें वीर पुत्र दीजिए. हमें गायों से पुष्ट बनाइए. हमें अश्व दीजिए. हमें सेवक दीजिए. दोपाए और चौपाए हमारे देवताओं के इस यज्ञ को ऋतु के अनुसार ले जाने की कृपा करें. ( १९ ) अग्ने पत्नीरिहा वह देवानामशतीरुप. त्वष्टार ᳵ सोमपीतये.. (२०) हे अग्नि! देव पत्नियां भी आहुति चाहती हैं. उन के लिए भी आहुति देते हैं. त्वष्टा देव को आप सोमपान के लिए हमारे पास लाने की कृपा कीजिए. ( २० ) अभि यज्ञं गृणीहि नो ग्नावो नेष्टः पिब ऋतुना. त्व ᳵ हि रत्नधा ऽ असि.. (२१) हे अग्नि! आप हमारे लिए श्रेष्ठ धन धारिए. आप हमारे गणमान्य यज्ञ को संपन्न कराइए. आप हमारे लिए रत्न धारिए. आप ऋतु के अनुसार सोमरस पीजिए. ( २१ ) द्रविणोदाः पिपीषति जुहोत प्र च तिष्ठत. नेष्ट्रादृतुभिरिष्यत.. (२२) यजुर्वेद - ३२५